Tikamgarh News: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बाजीतपुरा में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। शासन की महत्वाकांक्षी ‘रोजगार गारंटी योजना’ (मनरेगा) की धज्जियां उड़ाते हुए यहाँ मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से तालाब का निर्माण कराया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि कागजों में मजदूरों के नाम दर्ज कर मास्टर रोल भरे जा रहे हैं, जबकि असल काम मशीनों से हो रहा है।
मजदूरों के नाम पर मशीनों का ‘खेल’, भ्रष्टाचार की खुली पोल
Tikamgarh News: ग्रामीणों और स्थानीय किसानों का आरोप है कि बाजीतपुरा में चल रहे तालाब निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती जा रही है। मौके पर मौजूद जेसीबी चालक ने खुद स्वीकार किया कि यह काम एक क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि के पुत्र द्वारा ठेके पर कराया जा रहा है। जहाँ एक ओर गाँव के गरीब मजदूर काम न मिलने के कारण पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं सरपंच और सचिव कथित तौर पर अपने सगे-संबंधियों के नाम मास्टर रोल में दर्ज कर भुगतान की तैयारी में हैं।
कैंसर पीड़ित किसान की पीड़ा: पटेती भूमि पर जबरन खुदाई और पेड़ों की कटाई
Tikamgarh News: इस पूरे मामले का सबसे दुखद पहलू कैंसर पीड़ित किसान रामप्रasad रजक से जुड़ा है। किसान का आरोप है कि उसकी निजी पटेती भूमि पर जबरन तालाब की खुदाई कर दी गई है। इतना ही नहीं, खेत में लगे हरे-भरे पेड़ों को भी मशीन से उखाड़ फेंका गया। पीड़ित किसान ने बताया कि अधिकारियों को इस जमीन के मालिकाना हक की जानकारी होने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
इंजीनियरों और सचिव की भूमिका संदिग्ध: बिना निरीक्षण के सत्यापन का आरोप
Tikamgarh News: भ्रष्टाचार की यह जड़ें काफी गहरी नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जनपद पंचायत के उपयंत्री (Sub-Engineer) और सहायक यंत्री (Assistant Engineer) बिना मौके पर पहुंचे ही मशीनों द्वारा किए गए काम का भौतिक सत्यापन कर देते हैं। इसे मजदूरों द्वारा किया गया कार्य बताकर फाइलों को आगे बढ़ा दिया जाता है। वहीं, जब इस बारे में पंचायत सचिव से सवाल किया गया तो उन्होंने निर्माण कार्य चलने की बात से ही इनकार कर दिया, जबकि सरपंच ने स्वीकार किया कि तालाब का काम जारी है।
कलेक्टर का कड़ा एक्शन: जांच पूरी होने तक भुगतान पर रोक
Tikamgarh News: बाजीतपुरा में मचे इस बवाल के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत सीईओ को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि जांच में गड़बड़ी और अनियमितता पाई जाती है, तो निर्माण कार्य निरस्त कर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सिस्टम पर उठते सवाल
Tikamgarh News: यह मामला सिर्फ एक पंचायत का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र मजदूरों तक नहीं पहुँच पा रहा है। यदि मशीनों से ही काम होना है, तो ‘रोजगार गारंटी’ का नाम देना महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।