बाड़मेर-जालोर के ग्रेनाइट में छिपा है ‘अरबों का खजाना’, केंद्र ने चीन को निर्यात रोका; खदानों पर अब सख्त पहरा
परमाणु ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट के बाद एक्शन: सिवाना की पहाड़ियों में मिले 1 लाख टन से ज्यादा रेअर अर्थ (Rare Earth) खनिजों को बचाने के लिए सरकार ने खदानों को अपने संरक्षण में लेना शुरू किया।

बाड़मेर
राजस्थान के बाड़मेर और जालोर जिले की धरती सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि देश का भविष्य उगल रही है। यहां की पहाड़ियों में ‘रेअर अर्थ’ (Rare Earth Elements) का दुर्लभ खजाना मिला है। इस रणनीतिक खोज के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है और एक बड़ा फैसला लेते हुए, यहां से चीन को निर्यात होने वाले ग्रेनाइट पर अघोषित रोक लगा दी है।
सरकार को आशंका थी कि चीन, ग्रेनाइट की आड़ में भारत से यह बेशकीमती ‘रेअर अर्थ’ खनिज ले जा रहा था। अब इन खदानों को सरकारी संरक्षण में लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।अरबों का खजाना’, केंद्र ने चीन को निर्यात रोका; खदानों पर अब सख्त पहरा
चीन की चालाकी और भारत का एक्शन
जालोर और बालोतरा के मोकलसर इलाके से निकलने वाले ग्रेनाइट की मांग अचानक चीन में बढ़ने लगी थी। सूत्रों के अनुसार, जब केंद्र सरकार ने इस पर गौर किया, तो यह बात सामने आई कि चीन की दिलचस्पी पत्थर में नहीं, बल्कि उस पत्थर में छिपे ‘रेअर अर्थ’ में है।
चीन वैश्विक स्तर पर रेअर अर्थ खनिजों का सबसे बड़ा प्लेयर है। भारत की इस संपदा पर चीन का एकाधिकार न हो, इसलिए सरकार ने तुरंत प्रभाव से चिह्नित खदानों से निर्यात रोक दिया है।अरबों का खजाना’, केंद्र ने चीन को निर्यात रोका; खदानों पर अब सख्त पहरा
1 लाख टन से ज्यादा का खजाना: परमाणु ऊर्जा विभाग सक्रिय
भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) ने पुष्टि की है कि बालोतरा के सिवाना की पहाड़ियों में करीब 1,11,845 टन दुर्लभ खनिज उपलब्ध है।
विभाग ने साल 2021-22 में यहाँ अन्वेषण कार्य शुरू किया था। वर्तमान में यहाँ जी-4 (प्रारंभिक अन्वेषण) और जी-3 (संसाधन जुटाने) स्तर का काम चल रहा है। राज्य में चल रही 195 खोज परियोजनाओं में सिवाना का इलाका अब सबसे प्रमुख बन गया है।
इन इलाकों में चल रही है खोज (Exploration Sites)
बालोतरा और आसपास के कई इलाकों में रेअर अर्थ की खोज और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इनमें प्रमुख हैं:
सिवाना: सेंजी की बेरी मेली, इंद्राणा, सुकलेश्वर मंदिर।
दंताला: निमाड़े की पहाड़ी, सिलोर।
अन्य: कुंडल-धीरा, मवड़ी, कालूड़ी, टापरा, गुड़ानाल, बाछड़ाऊ (धोरीमन्ना), गूंगरोट और रेलों की ढाणी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खजाना?
रेअर अर्थ एलीमेंट्स का इस्तेमाल मोबाइल, कंप्यूटर, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ और सैटेलाइट जैसे आधुनिक उपकरणों में होता है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है:
चीन से आयात: लगभग 700 टन प्रति वर्ष।
कुल आयात: 1185 टन (चीन, हांगकांग, जापान, अमेरिका आदि से)।
15 साल बाद जागी उम्मीद
उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में रेअर अर्थ होने के संकेत सबसे पहले 2011-12 में मिले थे, जिसे लेकर मीडिया में खबरें भी आई थीं। हालांकि, पुष्टि 2021-22 में हुई। पिछले 15 सालों में ग्रेनाइट के रूप में काफी मात्रा में यह खनिज अनजाने में विदेश भेजा जा चुका है, लेकिन अब सरकार की सख्ती से यह बहुमूल्य संपदा देश के विकास में काम आएगी।अरबों का खजाना’, केंद्र ने चीन को निर्यात रोका; खदानों पर अब सख्त पहरा









