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तुर्की को आर्थिक झटका: पाकिस्तान का साथ देना पड़ा भारी, देशभर में ‘बॉयकॉट तुर्की’ की लहर, स्वदेशी को मिलेगा बल!

तुर्की को आर्थिक झटका: पाकिस्तान का साथ देना पड़ा भारी, देशभर में ‘बॉयकॉट तुर्की’ की लहर, स्वदेशी को मिलेगा बल!

नई दिल्ली/उदयपुर: भारत की एकता और देशभक्ति की भावना एक बार फिर मिसाल बन रही है! तुर्की द्वारा पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किए जाने के बाद, देशभर में आम नागरिकों से लेकर व्यापारिक समुदायों तक, सभी ने एकजुट होकर ‘बॉयकॉट तुर्की’ अभियान को व्यापक रूप दिया है। यह अभियान न केवल तुर्की को एक कड़ा आर्थिक संदेश दे रहा है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।तुर्की को आर्थिक झटका

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पुणे में तुर्की सेबों की ‘ना’, स्वदेशी फलों की बहार

महाराष्ट्र के पुणे में व्यापारियों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए तुर्की से आयातित सेबों की बिक्री पर पूर्ण विराम लगा दिया है। कभी पुणे के फल बाजारों में तुर्की सेबों की धूम रहती थी, जिससे सालाना लगभग ₹1,000 से ₹1,200 करोड़ का व्यापार होता था, लेकिन अब यह कारोबार देशभक्ति की भावना के आगे नतमस्तक हो गया है। पुणे के एपीएमसी मार्केट के सेब व्यापारी, श्री सय्योग जेंडे ने गर्व से बताया, “हमने तुर्की से सेब मंगाना पूरी तरह बंद कर दिया है। यह फैसला हमने देशप्रेम और अपनी सरकार के समर्थन में लिया है। अब हम हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान और अन्य मित्र राष्ट्रों से सेब मंगा रहे हैं।” ग्राहकों ने भी इस मुहिम का स्वागत किया है, जिससे तुर्की सेबों की मांग में 50% तक की भारी गिरावट आई है। एक जागरूक ग्राहक ने कहा, “जब कोई देश हमारे राष्ट्र के विरुद्ध खड़ा हो, तो उससे सामान खरीदने की कोई विवशता नहीं होनी चाहिए। हमारे पास अपने देश में और अन्य मित्र देशों में बेहतर विकल्प मौजूद हैं।”तुर्की को आर्थिक झटका

उदयपुर के मार्बल उद्योग का तुर्की को करारा जवाब, भारतीय मार्बल को मिलेगा बढ़ावा

एशिया के सबसे बड़े मार्बल व्यापार केंद्र, राजस्थान के उदयपुर ने भी तुर्की को उसके पाकिस्तान समर्थक रवैये का मुंहतोड़ जवाब दिया है। उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स कमेटी ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि जब तक तुर्की पाकिस्तान का समर्थन करता रहेगा, उससे मार्बल का कोई आयात नहीं किया जाएगा। कमेटी के अध्यक्ष, श्री कपिल सुराना ने बताया, “भारत में आयात होने वाले कुल मार्बल का लगभग 70% हिस्सा तुर्की से आता था, लेकिन अब यह बंद हो जाएगा। यह निर्णय न सिर्फ तुर्की को एक स्पष्ट संदेश देगा, बल्कि भारतीय मार्बल उद्योग के लिए एक सुनहरा अवसर भी खोलेगा।”तुर्की को आर्थिक झटका

‘बॉयकॉट’ से स्वदेशी उद्योग को संजीवनी

श्री सुराना ने आत्मविश्वास से कहा, “जब तुर्की से आयात रुकेगा, तो स्वाभाविक रूप से भारत में उत्पादित मार्बल की मांग बढ़ेगी। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय खनन और निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।” यह कदम स्पष्ट करता है कि यदि देशभर की सभी मार्बल एसोसिएशन एकजुट हो जाएं, तो यह वैश्विक स्तर पर एक मजबूत संदेश जाएगा कि भारत सरकार अकेली नहीं, बल्कि देश का उद्योग और आम नागरिक भी राष्ट्रहित में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।तुर्की को आर्थिक झटका

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल में तुर्की के रुख ने भले ही भारतीय व्यापारियों को नाराज किया हो, लेकिन इस चुनौती ने एक अवसर भी प्रदान किया है। यह ‘बॉयकॉट तुर्की’ अभियान राष्ट्रप्रेम, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक बन गया है, जो दर्शाता है कि भारत अब हर स्तर पर अपने हितों की रक्षा करने और विरोधियों को उचित जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार और एकजुट है।तुर्की को आर्थिक झटका

Nidar Chhattisgarh Desk

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