डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान, मंदिर का रास्ता क्षतिग्रस्त, क्या प्रकृति दे रही है चेतावनी?

डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान, मंदिर का रास्ता क्षतिग्रस्त, क्या प्रकृति दे रही है चेतावनी?
मुख्य बिंदु:
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी पहाड़ पर बड़ा हादसा।
WhatsApp Group Join NowFacebook Page Follow NowYouTube Channel Subscribe NowTelegram Group Follow NowInstagram Follow NowDailyhunt Join NowGoogle News Follow Us!पहाड़ से एक विशाल चट्टान खिसककर नीचे गिरी, कई पेड़ धराशायी।
मंदिर तक जाने वाली नई सीढ़ियों और रास्ते को पहुंचा नुकसान।
ब्लास्टिंग और अवैज्ञानिक निर्माण को माना जा रहा हादसे की वजह, जांच शुरू।
गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
डोंगरगढ़ : डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान, आस्था के केंद्र डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी पहाड़ी पर उस वक्त दहशत फैल गई, जब पहाड़ का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इस हादसे में एक बड़ी चट्टान लुढ़कते हुए नीचे आई, जिससे कई पेड़ उखड़ गए और मंदिर तक जाने वाला एक मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह घटना पहली बार हुई है, जिसने स्थानीय लोगों और प्रशासन को चिंता में डाल दिया है।
बादल गरजने जैसी आई आवाज, थर्रा उठे लोग
यह हादसा मां रणचंडी मंदिर से ऊपर मां बम्लेश्वरी मंदिर तक जाने वाली नई सीढ़ियों के पास हुआ। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, सुबह अचानक बादलों के गरजने जैसी तेज आवाज आई। एक स्थानीय निवासी मान बाई नेताम ने बताया, “सुबह ऐसी आवाज आई जैसे बादल गरज रहे हों। मेरे लड़के ने चिल्लाकर कहा कि पत्थर गिर रहा है। हम तो बचपन से यहीं रह रहे हैं, लेकिन ऐसा भयावह मंजर पहली बार देखा है।”डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान

गनीमत रही कि विशाल चट्टान दूसरी चट्टानों में जाकर अटक गई, वरना नीचे बसे घरों तक पहुंचकर यह एक बड़ी तबाही का कारण बन सकती थी।डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान
प्राकृतिक हादसा या इंसानी लापरवाही?

हालांकि पहली नजर में यह एक प्राकृतिक घटना लग रही है, लेकिन इसके पीछे इंसानी छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार:
अवैज्ञानिक निर्माण: पहाड़ी पर लंबे समय से अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण कार्य और पत्थरों की कटाई चल रही है।
ब्लास्टिंग का शक: माना जा रहा है कि कुछ समय पहले पहाड़ी पर एक चट्टान को हटाने के लिए ब्लास्टिंग की गई थी, जिससे पहाड़ी की संरचना कमजोर हो गई।
पेड़ों की कटाई: अंधाधुंध कटाई ने भी पहाड़ की मिट्टी और चट्टानों की पकड़ को कमजोर किया है।
इन गतिविधियों ने पहाड़ी के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिसे इस हादसे का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान
प्रशासन का क्या कहना है?
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन परिक्षेत्र अधिकारी भूपेंद्र उइके ने बताया कि चट्टान और गिरे हुए पेड़ों को हटाकर श्रद्धालुओं के लिए रास्ता साफ करा दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह एक बड़ी चट्टान है, जिसे पूरी तरह हटाना संभव नहीं है। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई। प्रथम दृष्टया यह प्राकृतिक आपदा लगती है, लेकिन हम घटना के सही कारणों की जांच करेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।”डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान
यह घटना प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि आस्था और विकास के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ कितना खतरनाक हो सकता है। बिना भू-वैज्ञानिक जांच के हो रहे निर्माण कार्यों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी पहाड़ से गिरी विशाल चट्टान



















