प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट, संसद और मेट्रो में तैनात 31,000 CISF जवानों की मानसिक जांच?

प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट, संसद और मेट्रो में तैनात 31,000 CISF जवानों की मानसिक जांच?
नई दिल्ली: प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट, देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक विशेष पहल ‘प्रोजेक्ट मन’ चलाई जा रही है। यह प्रोजेक्ट जवानों में बढ़ते तनाव और मानसिक दबाव को कम करने तथा उनकी भावनात्मक सेहत को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
क्या है ‘प्रोजेक्ट मन’?
‘प्रोजेक्ट मन’ CISF और आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट (ABET) की एक संयुक्त पहल है, जिसका शुभारंभ नवंबर 2024 में किया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य CISF जवानों के लिए एक मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली का निर्माण करना है। हाल ही में, CISF के महानिदेशक और ABET की चेयरपर्सन नीरजा बिड़ला ने इस प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और इसके सकारात्मक परिणामों की सराहना की।प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट
75,000 से ज्यादा जवानों को मिली मदद
इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक 75,000 से अधिक CISF जवानों और उनके परिवारों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसमें समय पर परामर्श और आवश्यक हस्तक्षेप शामिल हैं, जिससे पूरे बल का मनोबल ऊंचा बना रहे। यह पहल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और जरूरत पड़ने पर सही इलाज मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट
संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान
प्रोजेक्ट के तहत, एयरपोर्ट, संसद भवन और दिल्ली मेट्रो जैसे अत्यधिक संवेदनशील स्थानों पर तैनात लगभग 31,000 जवानों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित मानसिक परेशानी, जैसे अवसाद, वैवाहिक तनाव या वित्तीय समस्याओं का समय रहते पता लगाना और उसका समाधान करना है।प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट
जमीनी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य की पहुंच
‘प्रोजेक्ट मन’ के अंतर्गत 1,726 अधिकारियों और अधीनस्थ अधिकारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रशिक्षित कर्मी अब कम जोखिम वाले मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों की पहचान करने और गंभीर मामलों को विशेषज्ञों के पास भेजने में सक्षम हैं। इस दो-स्तरीय प्रणाली ने यह सुनिश्चित किया है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता बल में जमीनी स्तर तक हर जवान को उपलब्ध हो।प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट
क्यों पड़ी इस प्रोजेक्ट की जरूरत?
ड्यूटी का तनाव, परिवार से दूरी और कठिन परिस्थितियां कई बार जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती हैं। geçmiş में ऐसी कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं जहां तनाव के कारण जवानों ने गलत कदम उठाए:
जनवरी 2017: औरंगाबाद में एक CISF जवान ने छुट्टी न मिलने से नाराज होकर अपने चार साथियों की गोली मारकर हत्या कर दी।
अप्रैल 2024: दिल्ली मेट्रो में तैनात एक जवान ने अपनी सर्विस राइफल से आत्महत्या कर ली।
मार्च 2025: कोलकाता के एक म्यूजियम में हुई फायरिंग में एक जवान ने अपने साथियों पर गोली चला दी, जिसमें एक की मौत हो गई।
इन घटनाओं को देखते हुए, जवानों के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है। ‘प्रोजेक्ट मन’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि हमारे जवान भावनात्मक रूप से मजबूत और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहें। इस पहल की सफलता को देखते हुए इसे आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है।प्रोजेक्ट ‘मन’: क्यों हो रही है एयरपोर्ट









