Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV: बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, क्या बेडरूम की रिकॉर्डिंग सबूत मानी जाएगी?

Bilaspur High Court Landmark Judgment: क्या फैमिली कोर्ट में बिना सर्टिफिकेट के इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस (जैसे CCTV फुटेज या CD) पेश किए जा सकते हैं? इस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामला एक ऐसे पति का है जिसने अपनी पत्नी के ‘अनैतिक आचरण’ को पकड़ने के लिए बेडरूम में ही CCTV कैमरा लगा दिया था।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फैमिली कोर्ट में इंसाफ के लिए तकनीकी बारीकियां आड़े नहीं आनी चाहिए। आइए जानते हैं पूरा मामला और हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
क्या है पूरा मामला? (The Backstory)
यह मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का है। एक पति ने अपनी पत्नी पर क्रूरता (Cruelty) और दूसरे पुरुषों के साथ ‘अश्लील चैटिंग’ व ‘न्यूड वीडियो कॉल’ करने का आरोप लगाया था। पति का दावा था कि उसकी पत्नी की हरकतें वैवाहिक मर्यादा के खिलाफ हैं।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
अपनी बात को साबित करने के लिए पति ने बेडरूम में Hidden CCTV Cameras लगवाए थे। इसकी रिकॉर्डिंग को एक CD में भरकर उसने फैमिली कोर्ट में तलाक (Divorce) की अर्जी के साथ पेश किया।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
फैमिली कोर्ट ने क्यों ठुकराया सबूत?
महासमुंद फैमिली कोर्ट ने पति के इस सबूत (CCTV Footage) को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट का तर्क था कि इस CD के साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-बी का सर्टिफिकेट नहीं लगा है।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
सर्टिफिकेट न होने की वजह से कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी और पत्नी के पक्ष में ‘दांपत्य अधिकारों की बहाली’ का आदेश दे दिया। इसके बाद पति ने इस फैसले को बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
High Court की बड़ी टिप्पणी: ‘तकनीक से बड़ा है न्याय’
जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को पलट दिया। हाईकोर्ट ने कुछ बेहद अहम बातें कहीं:
Section 14 of Family Court Act: हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 और 20 कोर्ट को यह पावर देती हैं कि वे किसी भी ऐसे साक्ष्य (Evidence) को स्वीकार कर सकते हैं जो मामले को सुलझाने में मदद करे, भले ही वह साक्ष्य अधिनियम की तकनीकी शर्तों पर पूरी तरह खरा न उतरता हो।
65-B Certificate अनिवार्य नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश करने के लिए हमेशा 65-B सर्टिफिकेट की अनिवार्यता नहीं होती, अगर वह न्याय के हित में हो।
Cross-Examination की अनुमति: कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब इस CCTV फुटेज को रिकॉर्ड पर लिया जाए और इस पर जिरह (Cross-examination) की जाए।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है और मामले को नए सिरे से सुनने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि यह मामला 4 साल से लंबित है, इसलिए इसे Priority के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
Expert Opinion: प्राइवेसी बनाम सबूत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो डिजिटल सबूतों के जरिए अपना पक्ष रखना चाहते हैं। हालांकि, बेडरूम में चुपके से कैमरा लगाना ‘Right to Privacy’ का उल्लंघन भी माना जा सकता है, जिस पर आने वाले समय में और बहस होने की संभावना है।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV
बिलासपुर हाईकोर्ट का यह फैसला डिजिटल युग में फैमिली कोर्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक लचीला और प्रभावी बनाएगा। अब इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को सिर्फ तकनीकी कमियों की वजह से खारिज नहीं किया जा सकेगा।Wife की न्यूड वीडियो कॉल और पति का CCTV



















