क्या देश में ‘राष्ट्रीय बीमारी’ घोषित होगा कैंसर? सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को सख्त नोटिस, ‘कोविन’ जैसे पोर्टल की उठी मांग

क्या देश में ‘राष्ट्रीय बीमारी’ घोषित होगा कैंसर? सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को सख्त नोटिस, ‘कोविन’ जैसे पोर्टल की उठी मांग. देश में कैंसर की डरावनी रफ़्तार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। कैंसर को पूरे देश में ‘अधिसूचित बीमारी’ (Notifiable Disease) घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने माना है कि देश के हेल्थ सिस्टम में कैंसर के प्रबंधन को लेकर गंभीर कमियां हैं।
क्यों पड़ी सुप्रीम कोर्ट के दखल की जरूरत?
यह याचिका एम्स (AIIMS) के मशहूर रिटायर्ड कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने दायर की है। कोर्ट में दी गई दलील के मुताबिक, भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से सिर्फ 17 ने ही कैंसर को ‘अधिसूचित बीमारी’ माना है। इसका मतलब यह है कि आधे देश में कैंसर के मरीजों का सही डेटा सरकार के पास पहुंच ही नहीं रहा। यह एक ऐसा अधूरा सिस्टम बन गया है, जिससे बीमारी की गंभीरता का सही अंदाजा लगाना नामुमकिन है।क्या देश में ‘राष्ट्रीय बीमारी’ घोषित होगा कैंसर?
हैरान करने वाला सच: 90% आबादी की कोई निगरानी नहीं
सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
-
अधूरा डेटा: राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) देश की केवल 10% आबादी को कवर करता है।
-
बड़ा खतरा: यानी देश की 90% आबादी का कैंसर डेटा किसी रिकॉर्ड में नहीं है।
-
नुकसान: सही आंकड़े न होने से सरकार न तो सही नीतियां बना पा रही है और न ही बजट का सही आवंटन हो पा रहा है।
झाड़-फूंक और देसी इलाज के दावों पर चिंता
याचिका में कैंसर के इलाज को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर भी गहरी चिंता जताई गई है। कोर्ट को बताया गया कि कई बार मरीज गोमूत्र या अन्य अवैज्ञानिक तरीकों के चक्कर में फंसकर अपना वक्त बर्बाद कर देते हैं। एक आरटीआई (RTI) के जवाब में यह साफ हो चुका है कि ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है, बीमारी बहुत बढ़ चुकी होती है। अगर कैंसर ‘नोटिफायबल’ होगा, तो हर केस की रिपोर्टिंग होगी और मरीज को सही रास्ता मिलेगा।क्या देश में ‘राष्ट्रीय बीमारी’ घोषित होगा कैंसर?
अब ‘कोविन’ ऐप की तरह ट्रैक होंगे कैंसर मरीज?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से एक ‘गेम चेंजर’ मांग की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह कोरोना के समय ‘कोविन’ (CoWIN) पोर्टल बना था, वैसा ही एक रियल-टाइम डिजिटल रजिस्ट्री सिस्टम कैंसर के लिए भी बनाया जाए।क्या देश में ‘राष्ट्रीय बीमारी’ घोषित होगा कैंसर?
इस सिस्टम से क्या फायदा होगा:
-
मरीजों की तुरंत पहचान और ट्रैकिंग होगी।
-
इलाज में देरी नहीं होगी।
-
सरकार सही नीतियां बना सकेगी।
गौरतलब है कि 2025 तक भारत में कैंसर के मामलों में 12.8% की बढ़ोतरी का अनुमान है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह कदम संजीवनी साबित हो सकता है।क्या देश में ‘राष्ट्रीय बीमारी’ घोषित होगा कैंसर?









