? एक स्कूल, कई नाम! स्कूल शिक्षा विभाग की अव्यवस्था पर फेडरेशन ने उठाए सवाल

? एक स्कूल, कई नाम! स्कूल शिक्षा विभाग की अव्यवस्था पर फेडरेशन ने उठाए सवाल
✍️ शिक्षक फेडरेशन ने वेतन, नियुक्ति और नामकरण में एकरूपता की मांग की
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। एक ही स्कूल के लिए तीन नाम, अलग-अलग पंजीयन, भिन्न-भिन्न वेतन स्रोत और दो-दो प्राचार्य जैसी स्थिति पर छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने कड़ी आपत्ति जताई है।एक स्कूल, कई नाम!
? एक स्कूल – तीन पंजीयन, तीन सेटअप, तीन बजट!
शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश चटर्जी, संगठन मंत्री कुबेर राम देशमुख, नरोत्तम दास मांडले और जिला अध्यक्ष देवेंद्र कुमार बंछोर ने बताया कि कई शासकीय विद्यालयों में:
- एक ही स्कूल का पंजीयन यूडाइस, फर्म्स एंड सोसाइटीज तथा पीएम श्री योजना के तहत किया गया है।
- स्कूल का संचालन प्रभारी मंत्री द्वारा नियुक्त समिति, जिला कलेक्टर, और सेजेस जैसी अलग-अलग इकाइयों द्वारा हो रहा है।
- एक ही स्कूल में दो अलग सेटअप और अलग वेतन मद से शिक्षकों-कर्मचारियों को भुगतान किया जा रहा है।
? वेतन और अंतिम सेवा लाभ में विलंब
फेडरेशन का कहना है कि सेवानिवृत्त या दिवंगत शिक्षकों के अंतिम सेवा लाभ का भुगतान अन्य स्कूलों के रिक्त पदों से हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व सरकार ने कई शालाओं का आहरण और संवितरण अधिकार सेजेस को सौंप दिया था, जो कि वित्त विभाग की अनुमति के बिना अवैध है।एक स्कूल, कई नाम!
? फेडरेशन की प्रमुख मांगें
- सभी स्कूलों का統ीक नाम – केवल “PM श्री स्कूल” रखा जाए।
- एकसमान भर्ती प्रक्रिया, वेतन मद और सेटअप लागू किया जाए।
- सेवानिवृत्त/दिवंगत शिक्षकों का भुगतान पूर्वानुसार वेतन मद से हो।
- सरकार स्कूल संचालन के लिए स्पष्ट नीति लाए।
? नामकरण में भ्रम: एक ही स्कूल, अलग-अलग क्षेत्रीय पहचान
बस्तर के कांकेर में स्थित विद्यालय का नाम “PM श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय” है, जबकि सरगुजा के कुनकुरी और मनोर में इससे मेल खाते दो अन्य स्कूल हैं। इससे शैक्षणिक पहचान और प्रशासनिक पारदर्शिता में समस्या उत्पन्न हो रही है।एक स्कूल, कई नाम!
? मुख्यमंत्री से अपील
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द इस संस्थागत भ्रम की स्थिति को समाप्त करें और सभी स्कूलों का नाम, ढांचा, नियुक्ति प्रक्रिया तथा वेतन व्यवस्था एकीकृत और पारदर्शी बनाएं।एक स्कूल, कई नाम!



















