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EOW चीफ अमरेश मिश्रा समेत 3 अफसरों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत, खारिज हुआ निजी परिवाद!

CG News Today: छत्तीसगढ़ पुलिस के बड़े अधिकारियों के लिए रायपुर कोर्ट से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। EOW Chief Amresh Mishra, ASP चंद्रेश ठाकुर और DSP राहुल शर्मा के खिलाफ दायर किए गए निजी परिवाद (Private Complaint) को अदालत ने निरस्त (Dismiss) कर दिया है।EOW चीफ अमरेश मिश्रा समेत 3 अफसरों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) आकांक्षा बेक ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अदालत के पास इस परिवाद पर विचार करने का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) नहीं है।EOW चीफ अमरेश मिश्रा समेत 3 अफसरों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

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क्या था पूरा मामला? (The Allegation)

परिवादी पक्ष ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) के अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। आरोप के मुताबिक, अफसरों ने कथित तौर पर धारा 164 के तहत दर्ज बयानों में कूट रचना (Forgery) की थी। इसे एक आपराधिक कृत्य बताते हुए परिवादी ने अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।EOW चीफ अमरेश मिश्रा समेत 3 अफसरों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

कोर्ट में हुई ‘High-Voltage’ बहस

इस मामले की सुनवाई के दौरान रायपुर कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली:

  • बचाव पक्ष की दलील: राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट रवि शर्मा ने पुरजोर तरीके से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जिन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की गई है, वे अपने शासकीय कर्तव्यों (Official Duties) का पालन कर रहे थे। कानून के अनुसार, सरकारी सेवकों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए वैधानिक संरक्षण (Legal Protection) प्राप्त होता है। उन्होंने साफ कहा कि यह मामला कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर है।

  • परिवादी पक्ष का तर्क: वहीं, परिवादी के वकील फैजल रिजवी ने इन दलीलों का विरोध किया। उनका कहना था कि यह परिवाद किसी अदालत के खिलाफ नहीं बल्कि एक अपराध की सूचना है, जिसकी सुनवाई करने का अधिकार कोर्ट को है।

अदालत का फैसला: क्यों खारिज हुआ परिवाद?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, JMFC कोर्ट ने तकनीकी आधार पर परिवाद को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि यह फैसला केस के ‘गुण-दोष’ (Merits) पर आधारित नहीं है, बल्कि Jurisdiction यानी क्षेत्राधिकार की कमी के कारण लिया गया है। कोर्ट ने माना कि वह इस स्तर पर इस परिवाद पर विचार नहीं कर सकती।EOW चीफ अमरेश मिश्रा समेत 3 अफसरों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

Key Highlights of the Case:

  1. Relief for Top Cops: ईओडब्ल्यू चीफ अमरेश मिश्रा और अन्य दो अफसरों को कानूनी प्रक्रिया से राहत मिली।

  2. Jurisdiction Issue: कोर्ट ने माना कि मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

  3. Section 197 Connection: सरकारी अधिकारियों को मिलने वाले कानूनी कवच (Sanction for Prosecution) की भूमिका यहाँ अहम रही।

निष्कर्ष (Conclusion)

छत्तीसगढ़ में हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच कर रहे EOW और ACB अधिकारियों के लिए यह अदालती फैसला एक बड़ी जीत माना जा रहा है। इस फैसले से साफ हो गया है कि शासकीय कार्य के दौरान की गई कार्यवाही पर निजी परिवाद दाखिल करने से पहले कानूनी प्रक्रियाओं और क्षेत्राधिकार का पालन करना अनिवार्य है।EOW चीफ अमरेश मिश्रा समेत 3 अफसरों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

Dr. Tarachand Chandrakar

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