
संविधान की असली प्रति पर जोर
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि 22 कृतियों वाली संविधान की मूल प्रति ही वास्तविक संविधान है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी प्रति का प्रचार-प्रसार नहीं होना चाहिए, जिसमें ये ऐतिहासिक कृतियां शामिल न हों। संविधान की मूल प्रति पर विवाद: जगदीप धनखड़ ने दी सख्त चेतावनी
संविधान में बदलाव केवल संसद की मंजूरी से संभव
धनखड़ ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया और कहा कि संविधान में बिना संसदीय संशोधन कोई बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संविधान की मूल प्रति में वर्णित सभी 22 कृतियों को शामिल किए बिना किसी भी प्रकाशन या बिक्री पर रोक लगनी चाहिए। संविधान की मूल प्रति पर विवाद: जगदीप धनखड़ ने दी सख्त चेतावनी
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये 22 कृतियां?
इन 22 कृतियों को संविधान के प्रत्येक अध्याय से जोड़ा गया है, जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता के गौरव को दर्शाती हैं। इनमें भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, महाभारत, महावीर, सम्राट विक्रमादित्य, लक्ष्मीबाई, नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसी ऐतिहासिक विभूतियों की चित्रण शामिल है। संविधान की मूल प्रति पर विवाद: जगदीप धनखड़ ने दी सख्त चेतावनी
कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
बीजेपी सांसद राधा मोहन अग्रवाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि बाजार में संविधान की बिना कृतियों वाली प्रतियां बेची जा रही हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के साथ असंवैधानिक छेड़छाड़ की जा रही है। इस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया और मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे अनावश्यक विवाद बताया। संविधान की मूल प्रति पर विवाद: जगदीप धनखड़ ने दी सख्त चेतावनी
सरकार की अगली कार्रवाई
सभापति धनखड़ ने सरकार से आग्रह किया कि संविधान की केवल वही प्रति उपलब्ध कराई जाए, जिसमें ये 22 कृतियां शामिल हों। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन उपलब्ध प्रतियों में भी इन कृतियों को अनिवार्य किया जाए। संविधान की मूल प्रति पर विवाद: जगदीप धनखड़ ने दी सख्त चेतावनी



















