मोदी की गारंटी पर अमल नहीं? पंचायत सचिवों का विधानसभा और मंत्रालय घेराव का ऐलान

मोदी की गारंटी पर अमल नहीं? पंचायत सचिवों का विधानसभा और मंत्रालय घेराव का ऐलान
रायपुर: छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों ने अपनी प्रमुख मांग शासकीयकरण (सरकारी कर्मचारी का दर्जा) को लेकर आंदोलन की रणनीति बना ली है। पंचायत सचिव संघ ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर अमल नहीं हुआ तो वे 17 मार्च को विधानसभा घेराव और 18 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2025 को मंत्रालय का घेराव भी किया जाएगा। मोदी की गारंटी पर अमल नहीं
मोदी की गारंटी का हवाला, सरकार पर दबाव
छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह पैकरा ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2023-24 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की गारंटी दी थी। इसके तहत 1995 से कार्यरत पंचायत सचिवों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने का वादा किया गया था। मोदी की गारंटी पर अमल नहीं
उन्होंने कहा कि 7 जुलाई 2024 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री और घोषणा पत्र की संयोजक (दुर्ग सांसद) की उपस्थिति में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण को आवश्यक बताया गया था। मोदी की गारंटी पर अमल नहीं
मुख्यमंत्री ने इस दौरान “मोदी की गारंटी” पूरी करने का भरोसा देते हुए तत्काल एक समिति के गठन की घोषणा की थी।
समिति की रिपोर्ट तैयार, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
राज्य सरकार के निर्देशानुसार, 16 जुलाई 2024 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने समिति गठित की और 30 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी थी। पंचायत सचिवों को उम्मीद थी कि बजट सत्र 2025 में शासकीयकरण की घोषणा होगी, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इससे पंचायत सचिवों में नाराजगी बढ़ गई है।
आंदोलन का ऐलान: चरणबद्ध रणनीति
प्रदेश पंचायत सचिव संघ ने 10 मार्च को कवर्धा में बैठक कर आगे की रणनीति तय की। संघ ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए तीन चरणों में आंदोलन की घोषणा की:
- 17 मार्च 2025 – विधानसभा घेराव
- 18 मार्च 2025 से – ब्लॉक मुख्यालयों में अनिश्चितकालीन हड़ताल
- 1 अप्रैल 2025 – राज्य मंत्रालय का घेराव
पंचायत सचिवों की मांगें क्या हैं?
- पंचायत सचिवों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादों को पूरा किया जाए।
- समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार जल्द फैसला ले।
सरकार की चुप्पी पर नाराजगी
संघ का कहना है कि सरकार ने अब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया है। पंचायत सचिवों ने 2018 में भी इसी मांग को लेकर आंदोलन किया था, लेकिन अभी तक ठोस समाधान नहीं निकला।
क्या होगा असर?
अगर पंचायत सचिव अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाते हैं, तो पंचायतों के कार्य ठप हो सकते हैं। इसके चलते ग्रामीण विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है और सरकार को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार क्या करेगी?
अब देखने वाली बात होगी कि राज्य सरकार पंचायत सचिवों की मांगों को लेकर क्या रुख अपनाती है। क्या “मोदी की गारंटी” को पूरा किया जाएगा या फिर पंचायत सचिवों को दोबारा आंदोलन करना पड़ेगा?
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