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महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती, डिलीवरी के दौरान थप्पड़ मारा, नवजात की मौत

महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती, डिलीवरी के दौरान थप्पड़ मारा, नवजात की मौत

वाशिम, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती, महाराष्ट्र के वाशिम जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाने वाली एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक सरकारी महिला अस्पताल में 14 घंटे तक प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को कथित तौर पर समय पर इलाज नहीं मिला। परिवार का आरोप है कि इस भीषण लापरवाही के कारण उनके नवजात शिशु की जान चली गई और प्रसव के दौरान महिला के साथ क्रूरता भी की गई।

14 घंटे का दर्दनाक इंतजार, किसी ने नहीं सुनी पुकार

पालसखेड गाँव की निवासी शिवानी वैभव गव्हाणे को प्रसव पीड़ा होने पर 2 अगस्त की रात लगभग 3 बजे वाशिम के जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, उस समय डॉक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया कि सब कुछ सामान्य है और सुबह 10 बजे तक डिलीवरी हो जाएगी। लेकिन यह आश्वासन खोखला साबित हुआ। परिवार का आरोप है कि सुबह से लेकर शाम 5 बजे तक कोई भी डॉक्टर या नर्स शिवानी को देखने तक नहीं आया, जबकि वह दर्द से लगातार कराह रही थी।महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती

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शिवानी के ससुर ज्ञानेश्वर ने रुंधे गले से बताया, “हम बार-बार मदद के लिए स्टाफ को बुलाते रहे, लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं था। जब शाम को वे आए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती

डिलीवरी के दौरान हैवानियत, मारे थप्पड़ और पेट दबाया

परिवार ने अस्पताल के कर्मचारियों पर न केवल लापरवाही, बल्कि प्रसव के दौरान अमानवीय व्यवहार करने का भी संगीन आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब शिवानी असहनीय पीड़ा में थी, तो स्टाफ ने उसकी मदद करने के बजाय उसे थप्पड़ मारे, जोर-जबरदस्ती से उसका पेट दबाया और अप्रशिक्षित कर्मचारियों से जांच कराई। यह सब उस सरकारी अस्पताल में हुआ, जिस पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है।महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती

“यह लापरवाही नहीं, हत्या है” – बिलखते परिवार की गुहार

शाम करीब 5:30 बजे शिवानी की डिलीवरी हुई, लेकिन बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा मृत पैदा हुआ है। मृतक नवजात की दादी लता ने बिलखते हुए कहा, “मेरी बहू को घंटों तक दर्द में तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। अगर समय पर एक इंजेक्शन भी लग जाता या डॉक्टर देख लेते, तो आज हमारा बच्चा जिंदा होता। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह एक बड़ा अपराध है।”महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती

परिवार ने इस पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वे चाहते हैं कि दोषी डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए, ताकि किसी और परिवार को इस दर्द से न गुजरना पड़े। फिलहाल इस मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।महाराष्ट्र में इंसानियत शर्मसार: 14 घंटे प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती

Dr. Tarachand Chandrakar

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