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आंखों में दिखने वाले काले धब्बे हैं हाई बीपी और डायबिटीज का अलार्म, नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी

आंखों में दिखने वाले काले धब्बे हैं हाई बीपी और डायबिटीज का अलार्म, क्या आपकी नजर के सामने अचानक काले धब्बे, धागे या मकड़ी के जाले जैसी आकृतियां तैरने लगी हैं? इन्हें ‘आई फ्लोटर्स’ (Eye Floaters) कहा जाता है। अक्सर लोग इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये आपकी सेहत से जुड़े गंभीर राज खोल सकते हैं। ये फ्लोटर्स हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकते हैं।

क्या होते हैं आई फ्लोटर्स?

हमारी आंखों के अंदर एक जेल जैसा तरल पदार्थ होता है, जिसे विट्रियस ह्यूमर कहते हैं। उम्र के साथ या कुछ बीमारियों के कारण यह तरल पदार्थ सिकुड़ने लगता है और इसमें छोटे-छोटे रेशे या कण बन जाते हैं। जब रोशनी इन पर पड़ती है, तो इनकी परछाई हमारी आंख के पर्दे (रेटिना) पर बनती है, जिसे हम फ्लोटर्स के रूप में देखते हैं।आंखों में दिखने वाले काले धब्बे हैं हाई बीपी और डायबिटीज का अलार्म

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हाई ब्लड प्रेशर कैसे पहुंचाता है आंखों को नुकसान?

हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण जल्दी सामने नहीं आते। जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह हमारी आंखों की रेटिना में मौजूद खून की बारीक नसों पर दबाव डालता है।आंखों में दिखने वाले काले धब्बे हैं हाई बीपी और डायबिटीज का अलार्म

  • हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी: इस दबाव के कारण नसें कमजोर हो जाती हैं, उनमें सूजन आ जाती है या वे फट सकती हैं।

  • खून का रिसाव: नसों से खून या तरल पदार्थ रिसकर आंख के विट्रियस ह्यूमर में फैल जाता है, जिससे अचानक बहुत सारे फ्लोटर्स दिखाई देने लगते हैं। यह आंखों की रोशनी के लिए एक गंभीर खतरा है।

डायबिटीज में क्यों बढ़ जाते हैं आई फ्लोटर्स?

डायबिटीज में खून में शुगर का स्तर बढ़ने से शरीर की नसें कमजोर होने लगती हैं और इसका सबसे ज्यादा असर आंखों पर पड़ता है।आंखों में दिखने वाले काले धब्बे हैं हाई बीपी और डायबिटीज का अलार्म

  • डायबिटिक रेटिनोपैथी: यह स्थिति तब होती है जब डायबिटीज के कारण रेटिना की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। शुरुआती चरणों में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते।

  • अचानक फ्लोटर्स दिखना: बीमारी बढ़ने पर कमजोर नसें फट सकती हैं, जिससे आंख के अंदर खून बहने लगता है। यह खून फ्लोटर्स के रूप में दिखाई देता है और इससे धुंधला भी दिख सकता है।

  • रेटिनल डिटैचमेंट का खतरा: गंभीर मामलों में डायबिटीज के कारण रेटिना अपनी जगह से खिसक सकती है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें तुरंत इलाज न मिलने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

अगर आप हाई बीपी या डायबिटीज के मरीज हैं, तो अपनी आंखों को बचाने के लिए इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • नियमित जांच: साल में कम से कम एक बार आंखों के डॉक्टर से रेटिना की पूरी जांच कराएं।

  • ब्लड प्रेशर कंट्रोल करें: डॉक्टर की सलाह से दवाइयां समय पर लें, खाने में नमक कम करें और नियमित व्यायाम करें।

  • शुगर लेवल मैनेज करें: अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।

क्या हैं इलाज के विकल्प?

अगर आई फ्लोटर्स का कारण हाई बीपी या डायबिटीज से जुड़ी रेटिनोपैथी है, तो डॉक्टर स्थिति की गंभीरता के आधार पर निम्नलिखित इलाज की सलाह दे सकते हैं:

  • आई इंजेक्शन: ये इंजेक्शन रेटिना की सूजन को कम करते हैं और नई खराब नसों को बनने से रोकते हैं।

  • लेजर ट्रीटमेंट: इस प्रक्रिया से लीक हो रही नसों को सील किया जाता है, ताकि खून का रिसाव रुक सके।

  • सर्जरी (विट्रेक्टॉमी): अगर आंख के अंदर बहुत ज्यादा खून जमा हो गया है, तो उसे हटाने और रेटिना की मरम्मत के लिए सर्जरी की जाती है।

निष्कर्ष: आंखों में दिखने वाले फ्लोटर्स को कभी भी हल्के में न लें। यदि आपको ये अचानक या ज्यादा संख्या में दिखें, तो तुरंत किसी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Dr. Tarachand Chandrakar

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