राजस्थान: स्कूली छात्रा की मौत के बाद जागा शिक्षा विभाग, स्कूलों के निर्माण कार्यों के लिए जारी की सख्त सेफ्टी गाइडलाइन

जयपुर: स्कूलों के निर्माण कार्यों के लिए जारी की सख्त सेफ्टी गाइडलाइन, उदयपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में छज्जा गिरने से 12 वर्षीय छात्रा की दर्दनाक मौत के बाद राजस्थान का शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ गया है। भविष्य में ऐसी किसी भी दुखद घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए, विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में चल रहे या भविष्य में होने वाले निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए एक नई और सख्त सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।स्कूलों के निर्माण कार्यों के लिए जारी की सख्त सेफ्टी गाइडलाइन
क्या हैं नई सुरक्षा गाइडलाइन के मुख्य बिंदु?
नई गाइडलाइन के तहत स्कूल परिसर में छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है:
खतरे की स्पष्ट चेतावनी: स्कूल भवन के किसी भी क्षतिग्रस्त या निर्माणाधीन हिस्से के पास तुरंत “खतरे का बोर्ड” लगाया जाएगा। साथ ही, उस पूरे क्षेत्र की मजबूत बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि कोई भी छात्र या स्टाफ सदस्य वहां न जा सके।
24 घंटे सुरक्षा गार्ड: ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए 24 घंटे एक सुरक्षा गार्ड की तैनाती अनिवार्य होगी।
क्षतिग्रस्त हिस्से के पास कक्षाएं नहीं: यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी जर्जर या क्षतिग्रस्त बिल्डिंग के आसपास स्थित कक्षाओं में पढ़ाई नहीं कराई जाएगी। छात्रों को सुरक्षित वैकल्पिक कक्षाओं में स्थानांतरित किया जाएगा।
विद्युत सुरक्षा: निर्माण कार्य के दौरान बिजली के सभी उपकरण ठीक से ग्राउंडेड होने चाहिए और परिसर में कहीं भी कोई खुला तार नहीं छोड़ा जाएगा।
सुरक्षित सामग्री भंडारण: निर्माण सामग्री को इस तरह से रखा जाएगा कि आवागमन का कोई भी रास्ता अवरुद्ध न हो। फिसलन वाली जगहों पर रेत बिछाई जाएगी।
आपातकालीन तैयारी: निर्माण स्थल पर फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) और फर्स्ट एड बॉक्स रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
अब सिर्फ इंजीनियर ही देखेंगे निर्माण कार्य
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए कहा कि अब से स्कूलों में निर्माण कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी किसी भी शिक्षक या अन्य विभागीय कर्मचारी को नहीं दी जाएगी। इन पदों पर केवल योग्य और पेशेवर इंजीनियरों की ही नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा, किसी भी निर्माण कार्य का भुगतान करने से पहले थर्ड-पार्टी निरीक्षण को अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि काम की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।स्कूलों के निर्माण कार्यों के लिए जारी की सख्त सेफ्टी गाइडलाइन



















