15 मिनट के लिए ‘लेडी सिंघम’ बनी 12वीं की छात्रा, कुर्सी संभालते ही दिए ऐसे आदेश कि पुलिस महकमे में मच गई हलचल
Santoshi Dhiwar SP: जांजगीर-चांपा में अनोखी पहल, छात्रा संतोषी ने संभाली कमान, महिला सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर दिए कड़े निर्देश।

जांजगीर-चांपा: 15 मिनट के लिए ‘लेडी सिंघम’ बनी 12वीं की छात्रा, कुर्सी संभालते ही दिए ऐसे आदेश कि पुलिस महकमे में मच गई हलचल. छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस प्रशासन का एक अनोखा और प्रेरक रूप देखने को मिला। यहां खाकी वर्दी वाले पुलिसकर्मियों के बीच स्कूल यूनिफॉर्म में बैठी एक छात्रा ने जब जिले की कानून-व्यवस्था की कमान संभाली, तो हर कोई हैरान रह गया। नवाचार के तहत 12वीं कक्षा की छात्रा संतोषी धीवर को 15 मिनट के लिए जिले का एसपी (Police Captain) बनाया गया। कुर्सी संभालते ही संतोषी ने ऐसे ताबड़तोड़ फैसले लिए कि पूरे शहर में हलचल मच गई।
15 मिनट का कार्यकाल, कड़े फैसले
जिले के एसपी विजय अग्रवाल की पहल पर एक दिन के लिए छात्रों को पुलिसिंग समझने का मौका दिया गया था। इसी दौरान संतोषी धीवर को एसपी की कुर्सी पर बैठाया गया। 15 मिनट के इस सांकेतिक कार्यकाल में संतोषी ने किसी अनुभवी अधिकारी की तरह तेवर दिखाए।5 मिनट के लिए ‘लेडी सिंघम’ बनी 12वीं की छात्रा
वायरलेस सेट पर गूंजी आवाज: कुर्सी पर बैठते ही संतोषी ने सबसे पहले वायरलेस सेट उठाया और पूरे जिले के पुलिस थानों को अलर्ट मोड पर रहने का आदेश दिया।
महिला सुरक्षा पर जोर: ‘स्पेशल एसपी’ ने मातहत अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर में लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा पुख्ता की जाए। उन्होंने छेड़छाड़ करने वाले मनचलों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए।
ट्रैफिक व्यवस्था: संतोषी ने शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई और पुलिसकर्मियों को चौराहों पर मुस्तैद रहने का फरमान सुनाया।
क्यों किया गया ऐसा प्रयोग?
जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा करियर काउंसलिंग और पुलिसिंग को समझने के लिए स्कूली बच्चों को आमंत्रित किया गया था। इसका उद्देश्य छात्रों, विशेषकर छात्राओं के भीतर आत्मविश्वास जगाना और उन्हें प्रशासनिक सेवाओं के प्रति प्रेरित करना था।5 मिनट के लिए ‘लेडी सिंघम’ बनी 12वीं की छात्रा
एसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि बच्चों के मन से पुलिस का डर निकालने और उन्हें कानून के प्रति जागरूक करने के लिए यह पहल की गई थी। जब संतोषी ने एसपी की कुर्सी संभाली, तो असली पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी उनके आदेशों को गंभीरता से सुनते नजर आए।5 मिनट के लिए ‘लेडी सिंघम’ बनी 12वीं की छात्रा
शहर में चर्चा का विषय
संतोषी धीवर के इस 15 मिनट के कार्यकाल की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। सोशल मीडिया पर भी इस पहल की जमकर तारीफ की जा रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे प्रयोग से न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित होते हैं। संतोषी के फैसलों ने यह साबित कर दिया कि अगर बेटियों को मौका मिले, तो वे किसी भी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं।5 मिनट के लिए ‘लेडी सिंघम’ बनी 12वीं की छात्रा














