चंद बिल्डरों के लिए गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं, सड़क चौड़ीकरण पर हेमंत ओस्तवाल का तीखा हमला
पूर्व पार्षद ने गंज चौक से कन्हारपुरी सड़क निर्माण पर उठाए सवाल, कहा- मास्टर प्लान 2031 की हो रही अनदेखी, गरीबों का आक्रोश भाजपा के अहंकार को ले डूबेगा।

राजनांदगांव। चंद बिल्डरों के लिए गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं, सड़क चौड़ीकरण पर हेमंत ओस्तवाल का तीखा हमला. शहर के पूर्व पार्षद और जन-नेता हेमंत ओस्तवाल ने गंज चौक से कन्हारपुरी तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने महापौर, जिला कलेक्टर और निगम आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि यह योजना आम जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि चंद रसूखदार बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है। ओस्तवाल ने प्रशासन से मांग की है कि गरीबों के आशियाने उजाड़ने से पहले इस योजना की पूरी सच्चाई जनता के सामने रखी जाए।
‘बिल्डरों की कॉलोनी चमकाने के लिए गरीबों पर वार’
हेमंत ओस्तवाल ने अपने पत्र में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद से गरीबों पर कानून का डंडा चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंज चौक से कन्हारपुरी मार्ग पर कई बड़े बिल्डरों की सैकड़ों एकड़ जमीन है। इन्हीं की कॉलोनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सड़क चौड़ीकरण का “तुगलकी फरमान” जारी किया गया है। इसके चलते पान ठेला, गुमटी और छोटे होटल चलाकर पेट पालने वाले गरीबों को बेदखल किया जा रहा है, जो अनुचित है।चंद बिल्डरों के लिए गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं
मास्टर प्लान और 64 करोड़ की राशि पर सवाल
ओस्तवाल ने शहर के मास्टर प्लान-2031 के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने महापौर मधुसूदन यादव और विधायक डॉ. रमन सिंह से पूछा कि क्या उन्होंने शासन से 64 करोड़ रुपये की स्वीकृति लेते समय शहर की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किया था?
उन्होंने कहा, “शहर का विकास रायपुर रोड या नागपुर नेशनल हाईवे की तरफ होना चाहिए क्योंकि व्यापार वहीं से जुड़ा है। जब ट्रांसपोर्ट नगर और मेडिकल कॉलेज पेंड्री रोड में हैं, तो कन्हारपुरी रोड को इतना चौड़ा करने का क्या औचित्य है? लखोली और कन्हारपुरी वार्ड में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, पहले जनप्रतिनिधियों को उस पर ध्यान देना चाहिए।”चंद बिल्डरों के लिए गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं
पुराने बायपास का क्या हुआ?
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ओस्तवाल ने याद दिलाया कि करीब 10 साल पहले 35 करोड़ रुपये की लागत से एक बायपास रोड बनी थी, जिसका आज तक उद्घाटन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पुराने प्रोजेक्ट्स धूल खा रहे हैं और अब नई योजना के नाम पर गरीबों को उजाड़ा जा रहा है।चंद बिल्डरों के लिए गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं
‘जनता के सामने रखें जमीनों का ब्यौरा’
पूर्व पार्षद ने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण था, तो निगम प्रशासन इतने सालों तक क्या कर रहा था? उन्होंने मांग की है कि चौड़ीकरण की कार्यवाही रोकने से पहले समाचार पत्रों के माध्यम से यह सार्वजनिक किया जाए कि वहां कितनी सरकारी जमीन है और कितनी निजी। ओस्तवाल ने चेतावनी दी कि यदि गरीबों की अनदेखी हुई, तो उनका आक्रोश सत्ता के अहंकार को भारी पड़ सकता है।चंद बिल्डरों के लिए गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं



















