MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी, 30 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा ‘जहर’

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नगर परिषद की लापरवाही: 12 साल से टंकी की सफाई का कोई रिकॉर्ड नहीं।
पुरानी तकनीक: 30 साल पुरानी पाइपलाइनें बन रहीं बीमारियों की वजह।
WhatsApp Group Join NowFacebook Page Follow NowYouTube Channel Subscribe NowTelegram Group Follow NowInstagram Follow NowDailyhunt Join NowGoogle News Follow Us!स्वास्थ्य संकट: शहर में बढ़ रहे हैं पेट दर्द और त्वचा रोग के मामले।
प्रशासनिक सुस्ती: इंदौर की घटना के बाद जागे अधिकारी, लेकिन समाधान अब भी दूर।
हरपालपुर (छतरपुर)। MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिस टंकी से पूरे शहर की प्यास बुझती है, उसकी सफाई पिछले 12 सालों से न हुई हो? मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हरपालपुर नगर परिषद की भीषण लापरवाही ने हजारों लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। यहां 50 हजार गैलन क्षमता वाली पानी की टंकी 12 वर्षों से गंदगी का केंद्र बनी हुई है, और जर्जर हो चुकी 30 साल पुरानी पाइपलाइन के जरिए घरों में ‘बीमारियां’ परोसी जा रही हैं।
नलों से आ रहा बदबूदार और मटमैला पानी
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. नगर के कई वार्डों में स्थिति यह है कि नलों से आने वाला पानी न केवल मटमैला है, बल्कि उससे नाली जैसी दुर्गंध आ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की इस अनदेखी के कारण वे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसी पानी का उपयोग खाना बनाने और अन्य दैनिक कार्यों में किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
2014 के बाद सुध लेना भूला प्रशासन
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. दस्तावेजों और स्थानीय जानकारी के अनुसार, हरपालपुर की मुख्य पानी की टंकी का निर्माण कार्य होने के बाद से इसका उचित रखरखाव नहीं किया गया। टंकी की दीवारों पर काई और जंग की मोटी परतें जम चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद ने कई बार शिकायतों के बावजूद केवल आश्वासनों का झुनझुना थमाया, लेकिन धरातल पर सफाई का कोई काम नहीं हुआ।
नालियों के बीच से गुजर रही हैं जर्जर पाइपलाइनें
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. शहर की पेयजल व्यवस्था लगभग 30 साल पुरानी पाइपलाइनों पर टिकी है। ये पाइप जगह-जगह से फूट चुके हैं और कई वार्डों में तो ये सीधे नालियों के भीतर से गुजर रहे हैं। जब भी लीकेज होता है, नालियों का गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिल जाता है। परिणाम यह है कि शहर में पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और बुखार के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
इंदौर हादसे के बाद सिर्फ खानापूर्ति!
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. हाल ही में इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद जिला प्रशासन की नींद टूटी है। कलेक्टर के आदेश पर हरपालपुर और नौगांव में सैंपलिंग शुरू की गई है। हालांकि, जनता इसे महज एक ‘दिखावटी कार्रवाई’ मान रही है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि जब तक टंकी की सफाई और पाइपलाइन का पूरी तरह बदलाव नहीं होगा, तब तक सैंपल लेने से कुछ नहीं बदलने वाला।
नौगांव में भी ‘राम भरोसे’ व्यवस्था
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. हरपालपुर जैसा ही हाल पड़ोसी नगर नौगांव का भी है। वहां लैब में टेक्नीशियन न होने के कारण बिना जांच के पानी सप्लाई किया जा रहा है। पानी को शुद्ध करने के नाम पर चौकीदार द्वारा अंदाज से फिटकरी मिलाई जा रही है, जिसकी गुणवत्ता और मात्रा पर सवाल उठना लाजिमी है।
खजुराहो ने पेश की मिसाल
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. एक ओर जहां हरपालपुर और नौगांव बदहाली का शिकार हैं, वहीं खजुराहो नगर परिषद ने नई पाइपलाइन बिछाकर स्थिति में सुधार किया है। वहां के निवासियों को अब पहले की तुलना में स्वच्छ जल मिल रहा है, जो यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो सुधार संभव है।
जनता का सवाल: बड़ी अनहोनी हुई तो जिम्मेदार कौन?
MP: 12 साल से नहीं धुली पानी की टंकी. नगरवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि दूषित पानी से कोई महामारी फैलती है या जान-माल का नुकसान होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नई पाइपलाइन और नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।



















