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“मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई…” हेमा मालिनी का वो खौफनाक सच, जिसने उड़ा दी थी सबकी नींद!

“मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई…” हेमा मालिनी का वो खौफनाक सच, जिसने उड़ा दी थी सबकी नींद! बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी ने दशकों तक सिल्वर स्क्रीन पर राज किया है। उनकी खूबसूरती और अभिनय के लाखों दीवाने हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे हेमा मालिनी ने एक ऐसा डरावना दौर भी देखा है, जिसे याद कर आज भी उनकी रूह कांप जाती है? अपनी बायोग्राफी में हेमा ने एक ऐसे ‘भूतिया’ घर का जिक्र किया है, जिसने उनकी रातों की नींद छीन ली थी।मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

मुंबई के उस बंगले का ‘खौफनाक’ मंजर

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हेमा मालिनी जब अपने करियर के शुरुआती दौर में चेन्नई से मुंबई शिफ्ट हुई थीं, तो उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। राम कमल मुखर्जी द्वारा लिखित उनकी बायोग्राफी ‘बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल’ में उस डरावने किस्से का विस्तार से वर्णन है। फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ की शूटिंग के दौरान हेमा बांद्रा के एक छोटे से फ्लैट में रहती थीं, लेकिन जल्द ही वे एक बड़े बंगले में शिफ्ट हो गईं। उन्हें लगा था कि वहां सुकून मिलेगा, पर वहां जो हुआ उसने उन्हें अंदर तक हिला दिया।मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

“अदृश्य शक्ति” और दम घुटने का अहसास

हेमा मालिनी ने अपनी किताब में खुलासा किया कि उस बंगले में उनके साथ हर रात कुछ अजीब होता था। उन्होंने बताया, “मैं अपनी मां के साथ सोती थी, लेकिन रात होते ही मुझे ऐसा महसूस होता था जैसे कोई मेरा गला दबा रहा है। मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगती थी।”मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

हेमा के अनुसार, उनकी मां ने भी खुद अपनी आंखों से देखा था कि वे रात भर कितनी बेचैन रहती थीं। पहले तो उन्होंने इसे वहम समझा, लेकिन जब यह सिलसिला हर रात का बन गया, तो उन्हें समझ आ गया कि उस घर में कोई ‘अदृश्य शक्ति’ है जो उन्हें वहां रहने नहीं देना चाहती।मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

जब घर छोड़ने पर मजबूर हुईं ‘ड्रीम गर्ल’

"मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई..." हेमा मालिनी का वो खौफनाक सच, जिसने उड़ा दी थी सबकी नींद!

उस बंगले के डरावने अनुभवों ने हेमा मालिनी को इतना डरा दिया था कि उन्होंने जल्द से जल्द वहां से निकलने का फैसला किया। साल 1972 में, जब वह अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सीता और गीता’ की शूटिंग कर रही थीं, तब उन्होंने जुहू में अपना खुद का बंगला खरीदा। वह बंगला एक गुजराती परिवार का था, जिसके चारों तरफ फैली हरियाली ने हेमा का मन मोह लिया था।मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

धर्मेंद्र और उस नए घर की खूबसूरत यादें

नए घर में शिफ्ट होने के बाद हेमा मालिनी की जिंदगी में खुशियां वापस आईं। इसी घर की यादें ताजा करते हुए हेमा ने बताया कि तब धर्मेंद्र (धरम जी) अक्सर वहां उनसे मिलने और कॉफी पीने आया करते थे। हेमा कहती हैं, “उस वक्त मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन मुझे उनसे प्यार हो जाएगा और मैं उन्हीं की पत्नी बनूंगी।”मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

आज वह डरावना बंगला हेमा मालिनी के लिए महज एक धुंधली और कड़वी याद बनकर रह गया है, लेकिन उनके संघर्ष के दिनों का यह ‘हॉरर चैप्टर’ आज भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहता है।मेरा गला दबाया, मैं सांस नहीं ले पाई

Dr. Tarachand Chandrakar

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