Labour Rights Controversy: “Trade Unions विकास में रुकावट?” CJI की टिप्पणी पर भड़का AICCTU; कहा- ‘मजदूरों के साथ हो रहा अन्याय’
CJI Remarks on Trade Unions: AICCTU Chhattisgarh Protests Against 'Anti-Labour' Comments.

Labour Rights Controversy: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा ट्रेड यूनियनों को लेकर की गई एक मौखिक टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आल इंडिया सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU) छत्तीसगढ़ ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। AICCTU का कहना है कि CJI की यह टिप्पणी न केवल तथ्यों के विपरीत है, बल्कि देश के मेहनतकश मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाली है।
क्या है पूरा मामला? (The Context)
Labour Rights Controversy: यह विवाद 29 जनवरी, 2026 को घरेलू कामगारों (Domestic Workers) के लिए कल्याणकारी उपायों की मांग वाली एक PIL (जनहित याचिका) की सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। कथित तौर पर सुनवाई के दौरान CJI ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि:
ट्रेड यूनियन औद्योगिक विकास (Industrial Growth) में बाधा डालते हैं।
Minimum Wage (न्यूनतम मजदूरी) तय करने से नियुक्तियों (Hiring) में दिक्कतें आती हैं।
AICCTU की कड़ी प्रतिक्रिया: “यह सामाजिक न्याय के खिलाफ है”
Labour Rights Controversy: ऐक्टू (AICCTU) छत्तीसगढ़ के राज्य महासचिव बृजेन्द्र तिवारी ने इसे मजदूरों के संघर्षों का अपमान बताया है। यूनियन का कहना है कि:
Mismanagement vs Unions: उद्योगों की बंदी का कारण ट्रेड यूनियन नहीं, बल्कि मैनेजमेंट का भ्रष्टाचार और फंड का गलत इस्तेमाल होता है।
Worker Safety: रिपोर्ट्स बताती हैं कि जहां यूनियन होती है, वहां लेबर लॉ (Labour Laws) बेहतर तरीके से लागू होते हैं और मजदूर अधिक सुरक्षित रहते हैं।
Historical Struggles: 8 घंटे की शिफ्ट, मिनिमम वेज और सोशल सिक्योरिटी जैसे अधिकार मजदूरों ने दशकों के संघर्ष और बलिदान से हासिल किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला
Labour Rights Controversy: AICCTU ने याद दिलाया कि खुद सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा है कि Article 23 के तहत न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम कराना “जबरन मजदूरी” (Forced Labour) के समान है। ऐसे में CJI का यह बयान मजदूरों के प्रति भेदभावपूर्ण सोच को दर्शाता है।
12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल (General Strike on Feb 12)
Labour Rights Controversy: इस विवाद के बीच ट्रेड यूनियनों ने अपनी कमर कस ली है। केंद्र सरकार के ‘लेबर कोड’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर श्रम कानूनों को खत्म करने की कोशिशों के खिलाफ 12 फरवरी को आम हड़ताल (General Strike) बुलाई गई है। इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और ग्रामीण मजदूर यूनियनों का भी समर्थन प्राप्त है।
AICCTU की मांग: “बयान वापस लें CJI”
Labour Rights Controversy: यूनियन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से अपनी टिप्पणी वापस लेने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर ज्यूडिशियरी ही मजदूर-विरोधी नजरिया अपनाएगी, तो देश के करोड़ों कामगारों का भरोसा न्यायपालिका से उठ जाएगा।



















