CG Paddy Procurement: धान उठाव में भारी सुस्ती और लक्ष्य से कम खरीदी! साय सरकार पर विपक्ष हमलावर, जानें क्या है पूरा मामला?

CG Paddy Procurement: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी (Paddy Procurement) का सीजन तो बीत गया, लेकिन अब धान के उठाव (Lifting) को लेकर प्रदेश में सियासत गरमा गई है। ताजा आंकड़ों ने साय सरकार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि लक्ष्य के मुकाबले न केवल धान की खरीदी कम हुई है, बल्कि खरीदे गए धान का उठाव भी बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा है।
सिर्फ 32% धान का उठाव, मंडियों में लगा अंबार (The Lifting Crisis)
CG Paddy Procurement: रायपुर समेत पूरे प्रदेश में 31 जनवरी तक धान खरीदी का अभियान चला। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
Slow Lifting: अब तक मिलर्स ने केवल 32.25% धान का ही उठाव किया है।
Buffer Limit Cross: प्रदेश के 2740 केंद्रों में से 2316 केंद्र ऐसे हैं, जहाँ धान का स्टॉक ‘बफर लिमिट’ से ऊपर पहुंच गया है।
Risk of Damage: धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जिससे उसके खराब होने का डर सता रहा है। रायपुर जिले के ही 60 से ज्यादा केंद्रों में पैर रखने की जगह नहीं बची है।
Target से 20 लाख मीट्रिक टन पीछे रही सरकार?
CG Paddy Procurement: इस साल साय सरकार ने 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था। लेकिन असलियत कुछ और ही बयां कर रही है:
Actual Purchase: अब तक लगभग 140 लाख मीट्रिक टन (139.85 LMT) धान ही खरीदा गया है।
Shortfall: यह सरकारी लक्ष्य से करीब 20 लाख मीट्रिक टन कम है।
Missing Farmers: प्रदेश के करीब 8% किसान (लगभग 2.41 लाख) इस बार अपना धान नहीं बेच पाए हैं।
Deepak Baij का साय सरकार पर सीधा हमला (Political Clash)
CG Paddy Procurement: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस स्थिति को सरकार का ‘षड्यंत्र’ करार दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप लगाए:
AgriStack Portal Issues: बैज के अनुसार, पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों की वजह से हजारों किसान पंजीयन नहीं करा पाए।
Forced Area Surrender: आरोप है कि कई किसानों की सहमति के बिना उनका रकबा सरेंडर करवा दिया गया और उनके टोकन निरस्त कर दिए गए।
Demand for Extension: कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार 15 दिनों का विशेष अभियान चलाकर उन किसानों का धान खरीदे जो वंचित रह गए हैं।
किसानों की स्थिति और गरियाबंद की घटना
CG Paddy Procurement: विपक्ष का दावा है कि धान न बिक पाने और टोकन कटने के कारण महासमुंद, कवर्धा और कोरबा जैसे इलाकों में किसान मानसिक तनाव में हैं। वहीं, दीपक बैज ने गरियाबंद के दुतकैया गांव में हुई हिंसा को लेकर भी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए और शांति की अपील की।



















