छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका: उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राज्य की पावर कंपनियों द्वारा पेश किए गए वित्तीय लेखे-जोखे के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि यदि प्रदेश सरकार ने समय रहते सब्सिडी का प्रावधान नहीं किया, तो घरेलू और औद्योगिक बिजली बिलों में 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ट्रिब्यूनल के निर्देश का असर
छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका:बिजली की दरों में इस संभावित वृद्धि के पीछे सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला है। पिछले वर्ष दिल्ली पावर कंपनी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि पावर कंपनियों का जो भी संचित घाटा है, उसे एक बार में ही वसूला जाना चाहिए। इसी निर्देश के आधार पर नेशनल ट्रिब्यूनल ने सभी राज्यों को घाटा कम करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
6,300 करोड़ का घाटा और नया टैरिफ प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने आगामी सत्र के लिए बिजली नियामक आयोग के समक्ष अपनी याचिका दायर की है। कंपनी ने वर्तमान वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए लगभग 6,300 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा बताया है।
याचिका के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
संभावित राजस्व: 26,216 करोड़ रुपये (प्रचलित दरों पर)।
अनुमानित खर्च: 25,460 करोड़ रुपये।
पुराना घाटा: नए सत्र के मुनाफे को समायोजित करने के बाद भी कंपनी को 6,300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता है।
क्या 20% तक बढ़ जाएंगे बिजली के दाम?
छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका:विशेषज्ञों और नियामक आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यदि आयोग इस घाटे में से 5,000 करोड़ रुपये को भी मान्य कर लेता है, तो इसकी भरपाई के लिए बिजली दरों में कम से कम 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी अनिवार्य हो जाएगी। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले साल मात्र 500 करोड़ का घाटा होने पर दरों में 2 फीसदी की वृद्धि हुई थी। इस बार घाटे का आंकड़ा कई गुना बड़ा है।
राज्य सरकार की सब्सिडी ही एकमात्र समाधान
छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका:आम जनता को इस “महंगी बिजली के करंट” से बचाने का अब एक ही रास्ता है—राज्य सरकार की सब्सिडी। यदि छत्तीसगढ़ सरकार अपनी ओर से पावर कंपनी को वित्तीय सहायता या सब्सिडी प्रदान करती है, तभी टैरिफ में होने वाली इस भारी वृद्धि को रोका जा सकता है। पूर्व में भी सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की थी।
बीच का रास्ता और तकनीकी चुनौतियां
छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका:नियामक आयोग घाटे की वसूली को तीन किस्तों (तीन साल) में बांटने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, इसमें एक बड़ा जोखिम शामिल है। यदि घाटे को पूरी तरह से एक बार में वसूल नहीं किया जाता, तो केंद्र सरकार की RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत मिलने वाली करोड़ों रुपये की ग्रांट प्रभावित हो सकती है। केंद्र की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए पावर कंपनी की वित्तीय स्थिति का सुदृढ़ होना आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका:फिलहाल, बिजली नियामक आयोग जनसुनवाई के माध्यम से विभिन्न पक्षों की राय ले रहा है। अंतिम फैसला सरकार के रुख और आयोग की गणना पर निर्भर करेगा। यदि सरकार वित्तीय बोझ खुद नहीं उठाती है, तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।



















