कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार: निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ स्वाहा, विमानन और ऑटो सेक्टर में भारी गिरावट

कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार: निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ स्वाहा, विमानन और ऑटो सेक्टर में भारी गिरावट, भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुआ। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया। इस वैश्विक अस्थिरता के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे महज कुछ ही घंटों में बाजार को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
बाजार में ऐतिहासिक गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी हुए धराशायी
कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार:कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचने का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया। बीएसई (BSE) सेंसेक्स 2,200 अंकों से ज्यादा फिसलकर 76,892 के स्तर पर आ गया। वहीं, निफ्टी-50 में भी करीब 2.8 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 23,960 के करीब पहुँच गया। बाजार की इस सुनामी में निवेशकों की करीब 13 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई।
क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें?
कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार:मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को खतरे में डाल दिया है। विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है, वहाँ आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने कीमतों को हवा दी है। ब्रेंट क्रूड में आई इस तेजी ने दुनिया भर में मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का नया डर पैदा कर दिया है।
विमानन सेक्टर पर सबसे गहरी मार: इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयर टूटे
कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार:बढ़ती तेल कीमतों का सबसे ज्यादा असर एयरलाइंस कंपनियों पर पड़ा। विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी के डर से इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर 7% से अधिक गिरकर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए। स्पाइसजेट की हालत और भी खराब रही, जिसके शेयर 8% तक लुढ़क गए। विमानन कंपनियों के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है, जिससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है।
ऑटो, पेंट और टायर कंपनियों के शेयरों में मची खलबली
कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार:कच्चा तेल केवल ईंधन नहीं, बल्कि कई उद्योगों के लिए कच्चे माल का स्रोत भी है। यही कारण रहा कि सोमवार को इन सेक्टर्स में भी भारी गिरावट रही:
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पेंट सेक्टर: कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव्स का उपयोग होने के कारण एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स और नेरोलैक के शेयरों में 3 से 5% की गिरावट आई।
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टायर सेक्टर: कच्चे माल की लागत बढ़ने की आशंका से जेके टायर और अपोलो टायर्स के शेयर 4% से 6.5% तक टूट गए।
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ऑटो सेक्टर: निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 3.9% की गिरावट रही। मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अशोक लेलैंड और टीवीएस मोटर जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।
बैंकिंग और आईटी सेक्टर भी नहीं रहे अछूते
कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार:गिरावट का दायरा इतना व्यापक था कि बैंकिंग और आईटी सेक्टर भी इससे बच नहीं पाए। सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक SBI के शेयरों में 6% की बड़ी गिरावट देखी गई। वहीं एक्सिस, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक भी 3-4% नीचे गिरे। आईटी सेक्टर में टीसीएस और इंफोसिस जैसे बड़े शेयरों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार:भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में जरा सी भी हलचल भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के समीकरण बिगाड़ देती है। वर्तमान भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए बाजार में आने वाले दिनों में भी अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।









