
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने कॉर्पोरेट दिवाला प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनियों के दिवाला मामलों में ‘पर्सनल गारंटर’ (Personal Guarantor) की भूमिका और उनसे जुड़ी कार्यवाही की निगरानी को मजबूत करने के लिए अब एक नई रिपोर्टिंग व्यवस्था शुरू की गई है।
पर्सनल गारंटर मामलों में उछाल और नई चुनौती
दिवालिया प्रक्रिया में पारदर्शिता की नई पहल:आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के बाद से पर्सनल गारंटर से संबंधित दिवाला मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब तक इन मामलों की रिपोर्टिंग के लिए कोई एक निश्चित या मानकीकृत (Standardized) फॉर्मेट उपलब्ध नहीं था। इसके अभाव में रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (RPs) को अक्सर ई-मेल के माध्यम से अलग-अलग स्वरूपों में जानकारी साझा करनी पड़ती थी, जिससे डेटा के प्रबंधन में कठिनाई होती थी।
रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स के लिए अब रिपोर्टिंग अनिवार्य
दिवालिया प्रक्रिया में पारदर्शिता की नई पहल:IBBI द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत, अब रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स को पर्सनल गारंटर से जुड़े हर दिवाला मामले की विस्तृत जानकारी एक निर्धारित फॉर्मेट में बोर्ड को देना अनिवार्य होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिवाला समाधान प्रक्रिया के हर चरण की बारीकी से निगरानी करना और इसमें होने वाली देरी को कम करना है।
नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं:
ऑनलाइन सबमिशन की सुविधा: अब सभी रिपोर्ट और फॉर्म ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। इससे कागजी कार्यवाही कम होगी और मानवीय त्रुटियों (Manual Errors) की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
मानकीकृत फॉर्मेट: पहली बार पर्सनल गारंटर मामलों के लिए एक यूनिफॉर्म रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया गया है। इससे पहले ऐसी व्यवस्था केवल कंपनियों के लिक्विडेशन और दिवाला मामलों तक सीमित थी।
त्वरित निगरानी: नए फॉर्म्स के माध्यम से दिवाला प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी सीधे बोर्ड तक पहुँचेगी, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी।
क्यों महसूस की गई इस बदलाव की आवश्यकता?
दिवालिया प्रक्रिया में पारदर्शिता की नई पहल:विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी व्यवस्था में रिपोर्टिंग के लिए कोई स्पष्ट ढांचा नहीं होने के कारण प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ रही थीं। ई-मेल आधारित रिपोर्टिंग में अक्सर महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाने या देरी होने का जोखिम रहता था।
नया सिस्टम लागू होने के लाभ:
पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होगी और स्टेकहोल्डर्स को सही समय पर सटीक जानकारी मिल सकेगी।
प्रशासनिक सुगमता: व्यवस्थित डेटा होने से बोर्ड और पेशेवरों के बीच समन्वय बेहतर होगा।
समय की बचत: ऑनलाइन फॉर्म भरने से समय बचेगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से ट्रैक की जा सकेगी।
दिवालिया प्रक्रिया में पारदर्शिता की नई पहल:IBBI की यह नई पहल दिवाला कानून (IBC) को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। पर्सनल गारंटर मामलों की सख्त निगरानी से न केवल ऋणदाताओं का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि दिवाला समाधान की पूरी प्रक्रिया अधिक पेशेवर और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।



















