
रायपुर में धान खरीदी केंद्रों पर बड़ी लापरवाही:छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के बाद अब केंद्रों पर रखे स्टॉक के भौतिक सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में रायपुर जिले के धरसींवा विकासखंड से एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्राम खौना स्थित धान उपार्जन केंद्र में जांच के दौरान करीब 229.60 क्विंटल धान कम पाया गया है।
भौतिक सत्यापन में खुली आंकड़ों की पोल
खाद्य विभाग और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने जब खौना उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया, तो स्टॉक और रजिस्टर के आंकड़ों में भारी अंतर मिला। जांच रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र में धान की जितनी मात्रा होनी चाहिए थी, हकीकत में वह वहां मौजूद नहीं थी। इस ‘शॉर्टेज’ की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है।
समिति प्रबंधक पर गिरेगी गाज, 3 दिन का अल्टीमेटम
धान की इस कमी के लिए सीधे तौर पर समिति प्रबंधन को जिम्मेदार माना जा रहा है। अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठोर ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित सिलयारी के प्रबंधक को इस संबंध में पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खौना समिति के प्रबंधक पवन कुमार देवांगन के विरुद्ध नियमानुसार 3 दिनों के भीतर कड़ी कार्रवाई की जाए।
आंकड़ों का गणित: 574 बोरी धान का कोई हिसाब नहीं
जांच टीम (जिसमें खाद्य निरीक्षक शैलेंद्र एक्का, शुभा गुप्ता और सहकारिता विस्तार अधिकारी शशांक बल्लेवार शामिल थे) ने बताया कि:
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कुल खरीदी: 15 नवंबर से 2 फरवरी के बीच 48,826 क्विंटल (1,22,065 बोरी) धान की खरीदी हुई थी।
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उठाव: मिलर्स ने कुल 48,576.22 क्विंटल (1,21,441 बोरी) धान का उठाव किया।
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शेष होना था: रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 249.60 क्विंटल (624 बोरी) धान शेष रहना चाहिए था।
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वास्तविक स्थिति: मौके पर केवल 50 बोरी धान मिला।
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कुल कमी: कुल 229.60 क्विंटल यानी 574 बोरी धान गायब पाया गया है।
जिले के अन्य केंद्रों पर भी मंडरा रहा जांच का साया
विभागीय सूत्रों के अनुसार, रायपुर जिले में केवल खौना ही नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक ऐसे केंद्र हैं जहां 20 से 70 क्विंटल तक धान कम होने की जानकारी मिली है। हालांकि, फिलहाल प्रशासन ने खौना केंद्र पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में अन्य केंद्रों पर भी बड़ी जांच शुरू हो सकती है।
रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सहकारी नियमों के तहत उचित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









