आदिवासी छात्रावासों में भोजन पर सवाल, पैदल मार्च पर निकले विद्यार्थी

गोपहारू, जैतपुर और बुढ़ार के आदिवासी छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और रसोइयों की कमी पर सवाल उठे हैं। सुनवाई न होने पर विद्यार्थी संभागीय मुख्यालय तक पैदल मार्च पर निकले।
आदिवासी विद्यार्थियों को पढ़ाई, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित माहौल देने के लिए बनाए गए छात्रावास अब सवालों के घेरे में हैं। गोपहारू, जैतपुर और बुढ़ार के छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता और बाकी व्यवस्थाओं को लेकर विद्यार्थियों ने नाराजगी जताई है।

विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही। इसी वजह से वे अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण अंचलों से संभागीय मुख्यालय तक पैदल मार्च करने को मजबूर हैं।
किन छात्रावासों पर सवाल उठे हैं?
भोजन और व्यवस्थाओं को लेकर तीन जगहों के छात्रावासों का नाम सामने आया है:

- गोपहारू
- जैतपुर
- बुढ़ार
विद्यार्थियों की शिकायतें क्या हैं?
मिली जानकारी के अनुसार शिकायतें मुख्य रूप से इन बातों को लेकर हैं:
- भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता
- प्रशिक्षित रसोइयों की कमी
- छात्रावासों की सामान्य व्यवस्थाएं
रिपोर्ट में विद्यार्थियों और जिम्मेदारों की लापरवाही की बात कही गई है। पर किस छात्रावास में कौन सी कमी है, इसका ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं है।

सुनवाई न होने पर मार्च
विद्यार्थियों का कहना है कि बार-बार अपनी बात रखने के बाद भी समाधान नहीं मिला। इसलिए वे ग्रामीण क्षेत्रों से पैदल चलकर संभागीय मुख्यालय पहुंचकर अपनी आवाज उठाने निकले हैं।
छात्रावास व्यवस्था का मकसद
आदिवासी छात्रावास इसलिए बनाए जाते हैं कि दूरदराज के बच्चों को पढ़ाई के साथ पौष्टिक भोजन और सुरक्षित माहौल मिले। जब इन्हीं छात्रावासों में भोजन और व्यवस्था पर सवाल उठते हैं तो बच्चों की सेहत और पढ़ाई पर असर पड़ने की आशंका बनती है।
आगे क्या?
इन आरोपों पर संबंधित विभाग या प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मार्च में कितने विद्यार्थी शामिल हैं और अधिकारियों से उनकी कोई बातचीत हुई है या नहीं। विभाग का जवाब आने या जांच के नतीजे सामने आने तक ये बातें विद्यार्थियों के आरोप के रूप में ही देखी जाएंगी।









