न्यायाधीश के बयान पर कार्रवाई: हिंदू-मुस्लिम टिप्पणी को लेकर CJI एक्शन में

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस शेखर यादव के हिंदू-मुस्लिम टिप्पणी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में उनकी टिप्पणी के बाद से यह मामला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तक पहुंच चुका है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। न्यायाधीश के बयान पर कार्रवाई: हिंदू-मुस्लिम टिप्पणी को लेकर CJI एक्शन में
मामले की पृष्ठभूमि
- कार्यक्रम में टिप्पणी: जस्टिस शेखर यादव ने विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम समुदाय का उल्लेख कर टिप्पणी की, जो विवाद का कारण बनी।
- स्पष्टीकरण की मांग: 17 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस यादव से मुलाकात कर स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, उन्होंने अब तक माफी नहीं मांगी है और अपनी बात पर अड़े हुए हैं।
- पुनः रिपोर्ट की मांग: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, CJI ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में नई रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। न्यायाधीश के बयान पर कार्रवाई: हिंदू-मुस्लिम टिप्पणी को लेकर CJI एक्शन में
क्या कहता है न्यायिक दृष्टांत?
1995 में सी रविचंद्रन बनाम जस्टिस एएम भट्टाचार्य और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि हाईकोर्ट के जज के खिलाफ शिकायत की स्थिति में संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जांच करते हैं और फिर भारत के मुख्य न्यायाधीश से चर्चा होती है। न्यायाधीश के बयान पर कार्रवाई: हिंदू-मुस्लिम टिप्पणी को लेकर CJI एक्शन में
आगे की कार्रवाई
- आधिकारिक बयान का अभाव: अब तक इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
- कठोर कार्रवाई की संभावना: अगर जस्टिस यादव माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
- न्यायपालिका की साख: यह मामला न्यायाधीशों के आचरण और सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर न्यायपालिका की जवाबदेही का महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। न्यायाधीश के बयान पर कार्रवाई: हिंदू-मुस्लिम टिप्पणी को लेकर CJI एक्शन में



















