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Anganwadi News: किराये के एक कमरे में सिमटा बच्चों का भविष्य, जिले की 1754 आंगनबाड़ियों के पास अपनी छत नहीं

Anganwadi News: किराये के एक कमरे में सिमटा बच्चों का भविष्य, जिले की 1754 आंगनबाड़ियों के पास अपनी छत नहीं. मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है। जिले में संचालित होने वाले हजारों आंगनबाड़ी केंद्र बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में भले ही लाखों हितग्राहियों को लाभ देने की बात कही जा रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश केंद्र महज एक छोटे से किराये के कमरे में चल रहे हैं, जहाँ बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं है।

2452 केंद्रों में से केवल 698 के पास स्वयं का भवन

Anganwadi News: भिण्ड जिले में कुल 2,452 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 698 केंद्रों के पास ही सरकारी भवन उपलब्ध है। शेष 1,754 केंद्र किराये के कमरों में संचालित हो रहे हैं। इन निजी भवनों में स्थिति इतनी खराब है कि एक ही कमरे में राशन का सामान, अलमारी और कार्यकर्ता-सहायिका के बैठने के बाद बच्चों के लिए जगह ही नहीं बचती।

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दावों में 1.30 लाख हितग्राही, धरातल पर 25% भी नहीं

Anganwadi News: प्रशासन का दावा है कि जिले में हर माह करीब 1.30 लाख हितग्राहियों (बच्चों, धात्री माताओं और किशोरियों) को पोषण आहार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। लेकिन जमीनी पड़ताल बताती है कि सुविधाओं के अभाव और जगह की कमी के कारण केंद्रों पर पहुंचने वाले हितग्राहियों की संख्या 25 प्रतिशत भी नहीं है।

Anganwadi News: अव्यवस्थाओं के चलते धात्री माताएं और किशोरियां इन केंद्रों से दूरी बना चुकी हैं। वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों को ‘दलिया’ बांटने तक ही सीमित होकर रह गए हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: कहीं बच्चे गायब, तो कहीं सिर्फ कागजी मौजूदगी

Anganwadi News: आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जब निरीक्षण किया गया, तो गंभीर लापरवाही सामने आई:

  1. वार्ड क्रमांक 12: यहाँ किराये के एक छोटे से कमरे में केंद्र संचालित मिला। रिकॉर्ड में 24 बच्चे दर्ज थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 6 बच्चे मौजूद थे। बच्चों ने बताया कि वे यहाँ केवल पोषण आहार (दलिया) के इंतजार में बैठे हैं।

  2. वार्ड क्रमांक 30: इस केंद्र के पास अपना भवन तो है, लेकिन अव्यवस्था का आलम यह था कि सुबह 11:30 बजे एक भी बच्चा केंद्र पर मौजूद नहीं था। सहायिका का कहना था कि बच्चे खिचड़ी लेकर घर चले गए, जबकि खिलौने और अन्य संसाधन धूल फांक रहे थे।

भिण्ड आंगनबाड़ी: एक नजर में मुख्य आंकड़े (Fact File)

Anganwadi News: जिले में आंगनबाड़ी व्यवस्था की वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • कुल परियोजनाएं: 10

  • कुल सेक्टर: 100

  • कुल आंगनबाड़ी केंद्र: 2452

  • कार्यरत कार्यकर्ता: 2401

  • पंजीकृत पात्र लाभार्थी: 1,30,172

  • स्वयं के भवन: 698

  • पेयजल की सुविधा: 2365 केंद्रों में

  • शौचालय की स्थिति: 2126 केंद्रों में क्रियाशील

अव्यवस्थाओं से प्रभावित हो रहा ‘पोषण अभियान’

Anganwadi News: सरकारी भवनों के अभाव में न केवल बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि कुपोषण के खिलाफ चल रही जंग भी कमजोर पड़ रही है। जब केंद्रों पर बैठने की पर्याप्त जगह और स्वच्छ वातावरण ही नहीं होगा, तो हितग्राही वहां आने से कतराएंगे ही। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या केवल पोषण आहार बांट देने से बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है?

Anganwadi News: स्थानीय निवासियों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द इन केंद्रों के लिए स्वयं के भवनों का निर्माण कराए ताकि बच्चों को एक बेहतर और सुरक्षित परिवेश मिल सके।

Dr. Tarachand Chandrakar

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