Balod: 2021 में Naxal-Free तो हो गया, पर ‘Laal Paani’ की समस्या से कब मिलेगी आजादी? जानिए Ground Reality

Balod: बालोद जिला 2021 से नक्सल मुक्त है, लेकिन ‘लाल पानी’ (Mining Waste) ने किसानों की नाक में दम कर रखा है। क्या है महामाया और दल्लीराजहरा के गांवों का असली हाल? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Balod: छत्तीसगढ़ का बालोद जिला (Balod District) आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक समय था जब यह इलाका नक्सलियों के खौफ में जीता था, लेकिन साल 2021 में इसे आधिकारिक तौर पर ‘Naxal-Free District’ घोषित कर दिया गया। लेकिन क्या सच में यहाँ सब कुछ ठीक हो गया है?
Balod: Ground reality यह है कि नक्सलियों का लाल आतंक तो खत्म हो गया, पर अब यहाँ के ग्रामीण ‘लाल पानी’ (Mining Red Water) की समस्या से जूझ रहे हैं।
‘लाल पानी’ बना किसानों का दुश्मन: खेती हो रही बर्बाद

Balod: बालोद जिले के आड़ेझर, महामाया, कोपेडेरा और कटरेल जैसे गांवों में रहने वाले लोग आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। यहाँ के किसानों का कहना है कि माइंस से निकलने वाला ‘लाल पानी’ उनके खेतों में भर जाता है, जिससे पूरी फसल तबाह हो जाती है।
Zero Production: किसान मनोज और रणजीत सिंह के मुताबिक, कुमुडक़ट्टा और कोपेडेरा क्षेत्र के खेतों में धान तो बोया जाता है, लेकिन उपज शून्य (zero) होती है।
Protests & Promises: ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए कई बार चक्काजाम और प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन उन्हें हर बार केवल आश्वासन (Assurances) ही मिलता है।
Flashback: जब बालोद में गूंजती थी गोलियों की आवाज
Balod: भले ही आज बालोद सुरक्षित है, लेकिन इसका इतिहास काफी रक्तरंजित रहा है। यहाँ हुई कुछ बड़ी घटनाएं आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं:
2008 Barood Loot: 2 मार्च 2008 को नक्सलियों ने महामाया माइंस से ले जाए जा रहे 1750 किलो बारूद को CISF जवानों के सामने लूट लिया था।
Landmine Blast: 8 जून 2008 को पेट्रोलिंग से लौट रहे सुरक्षा बलों के वाहन को नक्सलियों ने IED ब्लास्ट से उड़ा दिया था।
Villager Murder: साल 2010 में नलकसा गांव के एक ग्रामीण राम भरोसा दुग्गा की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।
Pressure Cooker Bomb: 2017 में पूर्व CM डॉ. रमन सिंह की सभा से ठीक पहले सुरक्षा बलों ने एक बड़ा बम डिफ्यूज कर बड़ी साजिश नाकाम की थी।
Arrest of Naxal Supplier (2020)
Balod: नक्सल मुक्त होने से ठीक एक साल पहले, 6 जून 2020 को पुलिस ने गुंडरदेही के हरिशंकर गेडाम को गिरफ्तार किया था। उसके पास से AK-47 और SLR के 395 राउंड कारतूस मिले थे। वह नक्सलियों को वर्दी, टोपी और जरूरी सामान सप्लाई करता था।
प्रशासन का क्या कहना है? (Official Statement)
Balod: बालोद के SP योगेश पटेल ने बताया कि, “जिले को 2021 में नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है और वर्तमान में नक्सलियों की मौजूदगी की कोई पुष्टि नहीं है। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से कांकेर और राजनांदगांव की सीमाओं पर लगातार सर्चिंग ऑपरेशन (Searching Operations) चलाए जा रहे हैं।”
Conclusion: विकास की दरकार
Balod: बालोद जिला ‘लाल आतंक’ से तो मुक्त हो गया है, लेकिन दल्लीराजहरा के आसपास के गांवों को अब ‘लाल पानी’ के प्रदूषण से मुक्ति चाहिए। जब तक बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities) और साफ पानी नहीं मिलेगा, तब तक ‘विकास’ का दावा अधूरा ही रहेगा।



















