LIVE UPDATE
बस्तर

Bastar Shocker: क्या बस्तर की आवासीय शालाओं में फिर लौट आया 2013 का खौफ? 3 छात्राएं गर्भवती, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

Bastar Shocker: बस्तर के बीजापुर और सुकमा आवासीय स्कूलों में छात्राओं के गर्भवती होने से हड़कंप। क्या प्रशासन ने 2013 के झलियामारी कांड से कोई सबक नहीं लिया? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Bastar Shocker: Bastar Residential School News: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। बस्तर की बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। खबर है कि बीजापुर और सुकमा के आवासीय स्कूलों (Ashram-Hostels) में रहने वाली छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। इस खबर ने 2013 के उस काले ‘झलियामारी कांड’ की यादें ताजा कर दी हैं, जिससे पूरा देश दहल गया था।

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

झलियामारी कांड से अब तक नहीं लिया कोई सबक?

Bastar Shocker: साल 2013 में कांकेर जिले के झलियामारी कन्या आश्रम में 15 नाबालिग छात्राओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की वीभत्स घटना हुई थी। उस वक्त राज्य सरकार ने सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए थे और नई गाइडलाइन्स जारी की थीं। लेकिन, 2025 की शुरुआत में ही सामने आए इन नए मामलों ने साबित कर दिया है कि Safety Guidelines सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।

Bijapur और Sukma में क्या हुआ? (The Current Incident)

Bastar Shocker: ताजा जानकारी के अनुसार, बीजापुर जिले के एक पोटाकेबिन से तीन छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सामने आया है। इसके अलावा, सुकमा के कोंटा से भी एक छात्रा के गर्भवती होने की खबर है, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस संवेदनशील मुद्दे पर अब सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी विधायक विक्रम मंडावी ने विधानसभा में सरकार को घेरा, तो वहीं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करने की कोशिश की। हालांकि, छात्राओं के परिजनों और सरकार के बयानों में काफी अंतर देखा जा रहा है, जो मामले को और संदिग्ध बनाता है।

प्रशासन और मॉनिटरिंग पर उठे सवाल (Administrative Failure)

Bastar Shocker: बस्तर के हर जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी फौज तैनात है, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से लेकर मंडल संयोजक तक शामिल हैं। फिर भी सवाल यह है कि:

  • क्या हॉस्टलों का Regular Inspection नहीं होता?

  • इतने लंबे समय तक छात्राओं की स्थिति का पता वार्डन को क्यों नहीं चला?

  • क्या अधिकारियों के दौरे सिर्फ कागजी खानापूर्ति (Formality) बनकर रह गए हैं?

Guidelines vs Ground Reality: क्या नियम सिर्फ कागजों पर हैं?

Bastar Shocker: 2013 की घटना के बाद सरकार ने सख्त नियम बनाए थे, जिनका पालन जमीनी स्तर पर शून्य नजर आ रहा है:

  1. CCTV Cameras: सभी हॉस्टलों में कैमरे अनिवार्य थे, पर कई जगह ये बंद हैं या लगे ही नहीं।

  2. Female Staff: आश्रमों में केवल महिला वार्डन और स्टाफ की नियुक्ति होनी चाहिए।

  3. Entry Restrictions: बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

  4. Complaint Box: छात्राओं के लिए सीधे कलेक्टर तक शिकायत पहुँचाने की व्यवस्था फेल नजर आ रही है।

आखिर जिम्मेदार कौन?

Bastar Shocker: बस्तर के दुर्गम इलाकों में शिक्षा के लिए बनाए गए ये Ashram, Hostels और Pota Cabins अब बेटियों के लिए असुरक्षित महसूस होने लगे हैं। अगर समय रहते प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारी, तो झलियामारी जैसी दर्दनाक घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।

Dr. Tarachand Chandrakar

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE