
भानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद, पुलिस और नेता मालामाल?
भानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद, छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर और इसके गढ़ संबलपुर में जुए और सट्टे का अवैध कारोबार खुलेआम अपनी जड़ें जमा चुका है। यह एक ऐसा ‘खुला रहस्य’ है जिसके बारे में बच्चे-बच्चे को पता है, लेकिन हैरानी की बात है कि स्थानीय पुलिस इस पर आंखें मूंदे बैठी है। गंभीर आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक संरक्षण के चलते यह गोरखधंधा न केवल चल रहा है, बल्कि दिन-रात फल-फूल भी रहा है।
कैसे फैला है यह नेटवर्क? संबलपुर बना हॉटस्पॉट
भानुप्रतापपुर नगर और आसपास के गांवों, विशेषकर संबलपुर, में सट्टे का नेटवर्क एक सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है। संबलपुर इस काले कारोबार का मुख्य अड्डा बन चुका है, जहाँ लंबे समय से यह खेल चल रहा है। सूत्रों की मानें तो इस काले कारोबार की बागडोर राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के हाथ में है, जिन्हें कथित तौर पर प्रशासनिक संरक्षण भी मिला हुआ है। गांव के बीचों-बीच चल रहे इस धंधे की लत युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रही है।भानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद
1 रुपये के बदले 80 का लालच, बर्बादी की राह पर युवा
सट्टे का यह खेल 0 से 9 नंबरों पर आधारित है, जिसमें से नेट पर केवल एक नंबर खुलता है। खिलाड़ी अगर सही नंबर चुनता है, तो उसे 1 रुपए के बदले 80 रुपए मिलते हैं। यही भारी-भरकम मुनाफा युवाओं के लिए सबसे बड़ा लालच है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि बाकी 9 खिलाड़ियों का पैसा सीधे सट्टा माफिया की जेब में चला जाता है। इसी लालच में फंसकर युवा अपना पैसा, समय और भविष्य, सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं।भानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद
मोबाइल पर एक कॉल और घूमते-फिरते एजेंट्स
इस नेटवर्क को चलाने का तरीका भी बेहद शातिर है। संबलपुर में मुख्य खाईवालों ने 3 से 4 एजेंट्स को सट्टा-पट्टी लिखने के लिए काम पर रखा है। ये एजेंट्स पूरे गांव में घूम-घूमकर या फोन पर ही नंबर बुक करते हैं। नंबर खुलने पर जीत की रकम का लेन-देन भी इन्हीं एजेंट्स के जरिए होता है। बिना किसी कार्रवाई के डर से इन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अब खुलेआम इसका प्रचार कर रहे हैंभानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद
‘जांच करेंगे, कार्रवाई होगी’ – पुलिस का रटा-रटाया जवाब

जब इस मामले में भानुप्रतापपुर के टीआई रामेश्वर देशमुख से बात की गई, तो उन्होंने कहा, “सट्टा-पट्टी के बारे में आपके माध्यम से जानकारी मिल रही है। पहले तहकीकात करेंगे। मामला सही निकला तो कार्रवाई भी होगी।” हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जवाब हर बार सुनने को मिलता है, लेकिन ठोस कार्रवाई कभी नहीं होती।भानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद
क्या छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर ‘मगरमच्छों’ को बचाया जाएगा?
यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा उठा है। पहले कुछ अधिकारियों ने सख्ती दिखाई थी, जिससे कुछ समय के लिए यह कारोबार बंद भी हुआ था। लेकिन अब पुलिस की कथित चुप्पी और राजनीतिक संरक्षण के चलते यह फिर से अपने पैर पसार चुका है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस इस बार इस नेटवर्क की जड़ों पर, यानी बड़े खाईवालों पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएगी? या फिर कुछ छोटे-मोटे एजेंटों को पकड़कर खानापूर्ति कर ली जाएगी और असली ‘माफिया’ पर्दे के पीछे सुरक्षित बने रहेंगे?भानुप्रतापपुर-संबलपुर में सट्टे का मायाजाल: युवा बर्बाद



















