छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब सरकारी दफ्तरों में शुरू होगी प्रीपेड रिचार्ज सेवा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण की व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने जा रही है। प्रदेश में अब मोबाइल फोन की तर्ज पर बिजली का उपयोग करने के लिए पहले रिचार्ज कराना अनिवार्य होगा। छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को राज्य सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। योजना के पहले चरण में सरकारी विभागों के कनेक्शनों को प्रीपेड किया जा रहा है, जबकि आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।
स्मार्ट मीटर लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी
छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव:प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए ब्लॉक स्तर के सरकारी कार्यालयों में तेजी से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। पहले चरण के तहत करीब 1.72 लाख सरकारी कनेक्शनों को प्रीपेड में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 1.5 लाख दफ्तरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। शेष बचे 22 हजार मीटरों (मुख्यतः पंचायतों और आंगनबाड़ियों में) को भी 1 अप्रैल से पहले लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
सरकारी विभागों पर 3000 करोड़ रुपये का भारी बकाया
बिजली विभाग द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के पीछे की मुख्य वजह सरकारी विभागों पर बढ़ता बिजली बिल का बोझ है। अगस्त 2024 में यह बकाया करीब 1988 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर लगभग 3000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
बकायेदारों की सूची में प्रमुख विभाग:
नगरीय निकाय: लगभग 2000 करोड़ रुपये।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: 600 करोड़ रुपये से अधिक।
अन्य विभाग: 1 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक।
सरकार ने निर्णय लिया है कि इस बकाया राशि का भुगतान विभागों के बजट से किस्तों में बिजली कंपनी को किया जाएगा। राहत की बात यह है कि बकाया राशि की पहली किस्त के रूप में बिजली कंपनी को 600 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
अब 3 महीने का एडवांस रिचार्ज करना होगा अनिवार्य
नई प्रीपेड व्यवस्था के तहत ब्लॉक स्तर के लगभग 45 हजार सरकारी कनेक्शनों के लिए रिचार्ज के नियम तय कर दिए गए हैं। इन विभागों को अपने औसत मासिक खर्च के आधार पर आगामी 3 महीने का एडवांस रिचार्ज कराना होगा। एक बार रिचार्ज खत्म होने से पहले ही अगले तीन महीनों के लिए फिर से भुगतान करना अनिवार्य होगा, ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
आम जनता के लिए क्या है संकेत?
छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव:फिलहाल प्रीपेड मीटर की यह अनिवार्य व्यवस्था केवल सरकारी दफ्तरों के लिए लागू की जा रही है, जिससे आम जनता को अभी राहत मिली हुई है। हालांकि, विभाग की योजना स्पष्ट है कि सरकारी विभागों के सफल क्रियान्वयन के बाद, चरणबद्ध तरीके से घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के मीटरों को भी प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बदला जाएगा। इससे न केवल बिजली चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अपनी बिजली खपत की सटीक निगरानी करने में मदद मिलेगी।



















