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RTE में बड़ी लापरवाही: छत्तीसगढ़ में 6000 से ज्यादा गरीब बच्चों का टूटा सपना, 33 जिलों में खाली रह गईं हजारों सीटें

RTE में बड़ी लापरवाही:छत्तीसगढ़ में गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से लागू ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) कानून अपनी चमक खोता नजर आ रहा है। एक चौंकाने वाले खुलासे में सामने आया है कि सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश भर में 6352 सीटें खाली रह गई हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हजारों जरूरतमंद बच्चे निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने के अवसर से वंचित रह गए।

RTI से हुआ बड़ा खुलासा: 33 में से केवल 2 जिलों में भरे पूरे दाखिले

RTE में बड़ी लापरवाही:सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से केवल राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान ही ऐसे जिले हैं, जहां आरटीई की सभी सीटें भरी जा सकी हैं। बाकी 31 जिलों में स्थिति चिंताजनक है। हैरानी की बात यह है कि राजधानी रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शैक्षणिक केंद्रों में भी बड़ी संख्या में सीटें रिक्त पड़ी हैं।

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बड़े शहरों का बुरा हाल: रायपुर-बिलासपुर में सैकड़ों सीटें रिक्त

RTE में बड़ी लापरवाही:सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिन शहरों में सबसे ज्यादा मारामारी होनी चाहिए थी, वहीं सीटें खाली हैं:

  • रायपुर: 5198 सीटों में से 511 सीटें खाली रहीं।

  • बिलासपुर: 5203 सीटों में से 592 सीटें खाली रहीं।

  • दुर्ग: 4267 सीटों में से 750 सीटें खाली रहीं।

  • सूरजपुर: 2418 सीटों में से 584 सीटें खाली रहीं।

खाली सीटों के पीछे क्या है मुख्य कारण?

‘RTE में बड़ी लापरवाही:एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट’ के अध्यक्ष संजय थुल ने इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिखकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में सीटों का खाली रहना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. आवेदन प्रक्रिया में देरी और तकनीकी खामियां।

  2. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव।

  3. सत्यापन और लॉटरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी।

  4. निजी स्कूलों द्वारा सहयोग न करना।

2011 की सर्वे सूची पर विवाद: बदलाव की मांग

RTE में बड़ी लापरवाही:प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने नियमों में फेरबदल की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि वर्तमान में दाखिले के लिए 2011 की सर्वे सूची को आधार माना जा रहा है, जो कि काफी पुरानी है। वास्तविक गरीबों की पहचान के लिए वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर नया सर्वे होना चाहिए ताकि सही बच्चों को लाभ मिल सके।

आदिवासी क्षेत्रों में भी शिक्षा का अधिकार अधूरा

बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी बाहुल्य जिलों में भी स्थिति सुखद नहीं है। बस्तर में 206, बीजापुर में 128 और सुकमा में 37 सीटें खाली रह गई हैं। इन क्षेत्रों में पर्याप्त आवेदन न मिलना और स्क्रूटनी प्रक्रिया में बच्चों का बाहर होना बड़ी चिंता का विषय है।

जिलों के अनुसार रिक्त सीटों का विवरण (प्रमुख जिले):

जिले का नाम कुल सीटें कुल दाखिले कुल रिक्त सीटें
रायपुर 5198 4687 511
बिलासपुर 5203 4611 592
दुर्ग 4267 3517 750
जांजगीर-चांपा 4521 4074 447
रायगढ़ 2145 1839 306
सरगुजा 1603 1330 273

RTE कानून का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की खाई को पाटना है, लेकिन 6000 से अधिक सीटों का खाली रहना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं निगरानी और क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर भारी चूक हुई है। यदि समय रहते नियमों में सुधार और प्रक्रिया को सरल नहीं बनाया गया, तो ‘मुफ्त शिक्षा’ का यह अधिकार केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

Pooja Chandrakar

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