रायपुरअपराध

रायपुर कोर्ट का बड़ा फैसला: वकीलों से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR, नहीं बच पाएंगे कार्रवाई से

तेलीबांधा थाने में अधिवक्ताओं के साथ मारपीट मामले में कोर्ट सख्त, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद कुमार सिंह ने माना गंभीर अपराध, पुलिस प्रशासन को कार्रवाई के आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से न्याय व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) आनंद कुमार सिंह ने तेलीबांधा थाने के अंदर अधिवक्ताओं के साथ मारपीट करने वाले दो पुलिसकर्मियों—सहायक उपनिरीक्षक संतोष यादव और उपनिरीक्षक चित्रलेखा साहू—के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस कृत्य को गंभीर अपराध मानते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

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क्या है पूरा मामला

घटना 7 अप्रैल 2025 की है। तेलीबांधा थाना परिसर में अधिवक्ता हिमांशु ठाकुर और अजय साहू के साथ कथित रूप से गाली-गलौच और मारपीट की गई थी। इस घटना के बाद दोनों वकीलों ने मेडिकल जांच करवाई और इसकी लिखित शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रायपुर को सौंपी थी।वकीलों से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR, नहीं बच पाएंगे कार्रवाई से

मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को तेलीबांधा थाने से हटाकर रक्षित केन्द्र रायपुर में स्थानांतरित किया गया था। साथ ही थाने के सीसीटीवी फुटेज भी जांच के लिए मांगे गए थे। उस समय वरिष्ठ अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।वकीलों से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR, नहीं बच पाएंगे कार्रवाई से

न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

लंबे समय तक कोई कानूनी कार्रवाई न होने पर पीड़ित अधिवक्ताओं ने न्याय पाने के लिए रायपुर कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद कुमार सिंह ने पूरे मामले की गंभीरता को स्वीकारते हुए स्पष्ट कहा कि, “पुलिस कर्मियों द्वारा थाने में इस प्रकार की हरकत न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।”वकीलों से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR, नहीं बच पाएंगे कार्रवाई से

कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए।

कानूनी बिरादरी में स्वागत

अदालत के इस फैसले के बाद वकील समुदाय में संतोष और राहत का माहौल है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता और विधि शासन में विश्वास को मजबूत करता है।

पुलिस प्रशासन पर भी सवाल

यह मामला पुलिस विभाग की आंतरिक अनुशासन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर वर्दीधारी अधिकारी कानून की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें भी आम नागरिकों की तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा।वकीलों से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR, नहीं बच पाएंगे कार्रवाई से

यह फैसला न केवल पीड़ित अधिवक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास को और मजबूत करता है। अब पुलिस विभाग पर यह जिम्मेदारी है कि कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करे।वकीलों से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR, नहीं बच पाएंगे कार्रवाई से

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