
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में अफीम की अवैध खेती के मामले ने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। एक भाजपा नेता के फार्म हाउस पर चल रहे इस काले कारोबार की परतों को पुलिस अब एक-एक कर उखाड़ रही है। इस मामले में न केवल करोड़ों रुपये की अफीम जब्त की गई है, बल्कि सिंचाई के लिए संसाधनों की चोरी और तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संकेत भी मिले हैं।
शिवनाथ नदी से पानी चोरी और 8 करोड़ का काला साम्राज्य
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में अफीम की अवैध खेती का महाखुलासा:जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि अफीम की इस विशाल खेती को सींचने के लिए शिवनाथ नदी से अवैध रूप से पानी की चोरी की जा रही थी। आरोपी विनायक ताम्रकार ने बिना किसी अनुमति के नदी से मोटर पंप जोड़ रखे थे। पुलिस के अनुसार, जब्त की गई अफीम की बाजार में कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये आंकी गई है। जल संसाधन विभाग अब इस पानी चोरी के मामले में अलग से प्रतिवेदन तैयार कर रहा है।
150 मजदूरों और जेसीबी की मदद से उखाड़े गए 6000 किलो पौधे
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में अफीम की अवैध खेती का महाखुलासा:अफीम की फसल इतनी बड़े पैमाने पर थी कि इसे नष्ट करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी। रविवार और सोमवार को चले इस अभियान में लगभग 150 मजदूरों और जेसीबी मशीनों का सहारा लिया गया। करीब 6000 किलो अफीम के पौधों को जड़ से उखाड़कर जब्त कर लिया गया है। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद इन पौधों को किसी फैक्ट्री के फर्नेस (भट्टी) में जलाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।
राजस्थान कनेक्शन: विशेषज्ञों से करवाई जा रही थी खेती
पूरे खेल में राजस्थान के कनेक्शन ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि राजस्थान से विशेष मजदूरों को बुलाया गया था, जिन्हें अफीम की बुआई और देखभाल का गहरा अनुभव था। इस मामले में अचलाराम जाट नामक एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, फार्म हाउस के चारों ओर ऊंचे गेट और कड़ी सुरक्षा थी, जिससे किसी को भी अंदर चल रही गतिविधियों की भनक नहीं लगती थी।
मन्दसौर से पंजाब और हरियाणा तक फैला तस्करी का जाल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दुर्ग में उगाई गई इस अफीम को कंटेनरों के जरिए रात के अंधेरे में कवर्धा के रास्ते मध्य प्रदेश के मन्दसौर भेजा जाता था। मन्दसौर को अफीम की तस्करी का बड़ा हब माना जाता है, जहाँ से इसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बाजारों में खपाया जाता था। आरोपी विनायक ताम्रकार का इलाके में इतना खौफ था कि ग्रामीण इस संदिग्ध गतिविधि के खिलाफ बोलने से कतराते थे।
ड्रोन से निगरानी और पुलिस की आगे की कार्रवाई
दुर्ग एएसपी सुखनंदन राठौर ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान कड़ी पूछताछ जारी है। पुलिस अब फार्म हाउस के आसपास की अन्य जमीनों की भी ड्रोन कैमरों से जांच करने की योजना बना रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी ऐसी अवैध खेती तो नहीं हो रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार नामों के सामने आने की संभावना है।
दुर्ग का यह अफीम कांड न केवल नशीली दवाओं के खिलाफ एक बड़ी जीत है, बल्कि यह रसूखदारों की आड़ में चल रहे अवैध धंधों की पोल भी खोलता है। छत्तीसगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई क्षेत्र में ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।



















