CG Paddy Procurement Crisis: छत्तीसगढ़ के केंद्रों में फंसा 49 लाख MT धान; मौसम की मार और ‘सूखत’ ने बढ़ाई सरकार की टेंशन!

Chhattisgarh Dhaan Kharidi News: छत्तीसगढ़ के 2740 केंद्रों में अभी भी 48.93 लाख मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा है। Millers द्वारा धान का उठाव (Lifting) धीमा होने से ‘सूखत’ और बेमौसम बारिश का खतरा बढ़ गया है।CG Paddy Procurement Crisis
Chhattisgarh News Today: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का लक्ष्य तो पूरा हो गया है, लेकिन अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। प्रदेश के उपार्जन केंद्रों (Procurement Centers) से धान का उठाव (Lifting) काफी धीमी गति से हो रहा है। आलम यह है कि करीब 49 लाख मीट्रिक टन धान अभी भी खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जिस पर अब मौसम की मार और ‘सूखत’ (Dryness/Weight loss) का खतरा मंडरा रहा है।CG Paddy Procurement Crisis
Millers की सुस्ती से बढ़ा ‘सूखत’ का संकट
CG Paddy Procurement Crisis: धान का उठाव धीमा होने का सबसे बड़ा कारण मिलर्स (Millers) की कार्यप्रणाली को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर धान इसी तरह खुले में पड़ा रहा, तो बढ़ती गर्मी के कारण दानों की नमी कम हो जाएगी। इससे धान के कट्टे का वजन घट जाता है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘सूखद’ (Shrinkage) कहा जाता है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि स्टॉक मैनेजमेंट में भी बड़ी दिक्कत आएगी।
आंकड़ों की नजर में धान खरीदी की स्थिति (Quick Stats)
CG Paddy Procurement Crisis: खाद्य विभाग (Food Department) द्वारा 23 फरवरी 2026 तक जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
कुल उपार्जन केंद्र: 2740
कुल धान खरीदी: 1,41,04,365.58 मीट्रिक टन
खुले में पड़ा धान: 48,93,501.04 मीट्रिक टन
मिलर्स द्वारा उठाव: 78,39,599 मीट्रिक टन
संग्रहण केंद्रों को प्रदाय: 13,71,264.80 मीट्रिक टन
बेमौसम बारिश और गर्मी की दोहरी मार
CG Paddy Procurement Crisis: हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश (Unseasonal Rain) देखने को मिली है। खुले में रखे धान के भीगने से उसकी क्वालिटी खराब होने का डर है। वहीं, अब तापमान बढ़ने के साथ ही ‘सूखत’ की समस्या विकराल रूप ले सकती है। यदि 20 मार्च तक धान का उठाव तेज नहीं हुआ, तो नुकसान का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है।
सरकार ने बढ़ाया था समय, लेकिन उठाव में देरी
CG Paddy Procurement Crisis: आपको बता दें कि साय सरकार ने पहले 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी की घोषणा की थी। किसानों की मांग पर इसे 2 दिन और बढ़ाया गया था, जिसके बाद रिकॉर्ड तोड़ खरीदी हुई। लेकिन अब Slow Lifting की वजह से समितियों और सरकार दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।



















