देवभोग: सरकारी आवासों पर रसूखदारों का ‘कब्जा’, रेस्ट हाउस में रातें बिताने को मजबूर वर्तमान SDM

नियमों को ताक पर रखकर सरकारी सुख-सुविधा का उपयोग
देवभोग: सरकारी आवासों पर रसूखदारों का ‘कब्जा’, रेस्ट हाउस में रातें बिताने को मजबूर वर्तमान SDM, देवभोग में यह चर्चा आम है कि तत्कालीन बड़े अफसरों ने ही नियमों का उल्लंघन कर आवासों पर कब्जा जमाना शुरू किया था, जिसका अनुसरण अब उनके अधीनस्थ कर्मचारी भी कर रहे हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक, स्थानांतरण या निलंबन के बाद एक निश्चित अवधि के भीतर सरकारी घर खाली करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहाँ की स्थिति इसके बिल्कुल उलट है।
6 महीने से लॉज और रेस्ट हाउस में रहने को मजबूर वर्तमान SDM
सरकारी आवासों पर रसूखदारों का ‘कब्जा’,वर्तमान स्थिति यह है कि स्थानीय SDM सोरी पिछले 6 महीनों से पीडब्ल्यूडी (PWD) रेस्ट हाउस या निजी लॉज में रहकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। उन्हें हाल ही में मैनपुर एसडीएम का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है, लेकिन आवास की किल्लत वहां भी बरकरार है। एक अनुविभागीय अधिकारी (SDM) जैसे पद पर तैनात व्यक्ति को आवास न मिलना प्रशासन की बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है।
निलंबित अधिकारी अब भी जमाए हुए हैं कब्जा
सरकारी आवासों पर रसूखदारों का ‘कब्जा’,रिपोर्ट के मुताबिक, निलंबित अपर कलेक्टर तुलसी दास मरकाम अब सेवा से दूर हैं, फिर भी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बड़े अधिकारियों के लिए आरक्षित आवासों पर अब तक उनका कब्जा बना हुआ है। न तो पुराने अधिकारियों ने चाबियां सौंपी हैं और न ही संबंधित विभाग इन घरों को खाली करवाने की हिम्मत जुटा पा रहा है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
सरकारी आवासों पर रसूखदारों का ‘कब्जा’,आवासों के आवंटन और उन्हें खाली कराने की जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड और लोक निर्माण विभाग की होती है। लेकिन रसूखदार अफसरों के सामने नियम बौने नजर आ रहे हैं। जब जिले के शीर्ष अधिकारियों को ही सरकारी आवास नसीब नहीं हो रहे, तो आम कर्मचारियों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।



















