स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर, DPI ने जारी किया नया फरमान
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश: संस्था प्रमुख होंगे नोडल अधिकारी, डॉग कैचर को देनी होगी सूचना और बच्चों को काटने पर इलाज की जिम्मेदारी भी स्कूल की

रायपुर: स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर, DPI ने जारी किया नया फरमान. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों के अलावा शिक्षकों और प्राचार्यों को एक नई और अनोखी जिम्मेदारी निभानी होगी। राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश के स्कूलों में अब आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की निगरानी का जिम्मा स्कूल के प्राचार्यों (Principals) के कंधों पर डाल दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने इस संबंध में एक आदेश जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश भेज दिए हैं।
क्या है नया आदेश?

डीपीआई द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अब स्कूल के प्राचार्य या संस्था प्रमुख को आवारा कुत्तों के लिए ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किया जाएगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर की गई सुनवाई और दिए गए निर्देशों के परिपालन में लिया गया है।स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर
प्राचार्यों की होंगी ये तीन मुख्य जिम्मेदारियां:
विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से तीन बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन स्कूल प्रमुखों को करना होगा:
डॉग कैचर को सूचना देना: प्रत्येक स्कूल के प्राचार्य या संस्था प्रमुख को अपने स्कूल परिसर के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों पर नजर रखनी होगी। उन्हें इसकी सूचना तुरंत संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के ‘डॉग कैचर नोडल अधिकारी’ को देनी होगी।स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर
स्कूल में प्रवेश रोकना: स्कूल प्रमुख को स्थानीय निकायों (पंचायत/निगम) के सहयोग से यह सुनिश्चित करना होगा कि आवारा कुत्ते स्कूल परिसर के भीतर प्रवेश न करें। इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने होंगे।स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर
त्वरित इलाज: सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि यदि स्कूल समय में कोई आवारा कुत्ता किसी बच्चे को काट लेता है, तो प्रभावित छात्र को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर उसका उपचार सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संस्था प्रमुख की होगी।स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला
लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया है। कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवारा कुत्तों के आतंक को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही थी, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने यह जिम्मेदारी स्कूल स्तर पर अधिकारियों को सौंपी है।स्कूलों में अब आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी प्राचार्यों पर



















