डॉ. उमर का खौफनाक अतीत, जीवनदाता से बना मौत का सौदागर
मेडिकल कॉलेज से निकाले जाने के बाद कट्टरता की ओर बढ़ा कदम, एजेंसियां जांच में जुटीं

डॉ. उमर का खौफनाक अतीत, जीवनदाता से बना मौत का सौदागर. दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए भीषण धमाके की जांच में अब एक चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। जिस मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी को जांच एजेंसियां अब तक धमाके का मास्टरमाइंड मान रही थीं, उसके अतीत को लेकर एक नया सच सामने आया है। आजतक फैक्ट चेक टीम की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि उमर कभी एक काबिल डॉक्टर था, लेकिन तीन साल पहले एक मरीज की मौत के बाद उसे मेडिकल कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था।
10 नवंबर की शाम को जब दिल्ली के दिल को दहला देने वाला धमाका हुआ, तो हर कोई इस खबर से जुड़ी हर जानकारी जानने को उत्सुक था। लाल किले के पास धमाके में जलकर खाक हुई सफेद रंग की i20 कार के चालक के रूप में उमर की पहचान हुई थी। टीवी चैनलों पर छोटे बालों, सलीकेदार दाढ़ी और ट्रांसपेरेंट फ्रेम वाले चश्मे पहने उमर की तस्वीरें छा गई थीं। यह यकीन करना मुश्किल था कि जो व्यक्ति लोगों को जीवन देने का पेशा करता था, वही अब मौत का सौदागर बन गया है।डॉ. उमर का खौफनाक अतीत
प्रोफेसर जीलानी के अनुसार, उमर उस समय अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत था। उसने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई पूरी की थी। मरीज की लापरवाही से हुई मौत के मामले के बाद उसका करियर लगभग खत्म हो गया। बताया जा रहा है कि निष्कासन के बाद वह अवसाद में चला गया और धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारों की ओर झुकने लगा।डॉ. उमर का खौफनाक अतीत
जांच एजेंसियों को अब यह भी सुराग मिल रहा है कि उमर पिछले दो सालों से कुछ अज्ञात संपर्कों में था और उसने ऑनलाइन फोरम्स पर कट्टर इस्लामी विचारधारा से जुड़े अकाउंट्स को फॉलो किया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक डॉक्टर, जो कभी बीमारों का इलाज करता था, आखिर कैसे बम बनाने और निर्दोषों को मारने की राह पर चल पड़ा? दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनआईए इस पूरे मामले की तहकीकात में जुटी हुई हैं और उमर के संपर्कों, डिजिटल डिवाइस और बैंकिंग गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है।डॉ. उमर का खौफनाक अतीत



















