दिल्ली में मौसम की दोहरी मार: डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड

दिल्ली में मौसम की दोहरी मार: डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड
मानसून की बारिश बनी मुसीबत, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
नई दिल्ली: डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड, इस साल मानसून की भारी बारिश ने दिल्लीवासियों को गर्मी से तो निजात दिलाई है, लेकिन अब यह राहत एक बड़ी आफत का कारण बनती जा रही है। शहर में जगह-जगह जलभराव के कारण डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों ने अपने पैर पसार लिए हैं। इस साल इन संक्रामक बीमारियों के मामलों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
आंकड़ों में खतरनाक वृद्धि
दिल्ली नगर निगम (MCD) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक मलेरिया के 124 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा हैं।वहीं, 28 जुलाई तक डेंगू के 277 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले पांच सालों में इस अवधि के लिए दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में हुई सामान्य से अधिक बारिश और उसके परिणामस्वरूप हुआ जलभराव इस वृद्धि का मुख्य कारण है।डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड
बारिश और मच्छरों का प्रजनन
जुलाई महीने में दिल्ली में 259.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 209.7 मिमी है। इस अतिरिक्त पानी ने मच्छरों के प्रजनन के लिए एक आदर्श वातावरण तैयार कर दिया है। सिर्फ पिछले सात दिनों में, एमसीडी की टीमों ने 9,117 नए मच्छर प्रजनन स्थलों की पहचान की है, जो जनवरी से जुलाई तक पाए गए कुल 89,030 स्थलों का एक बड़ा हिस्सा है।डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड
कौन से इलाके हैं सबसे ज्यादा प्रभावित?
डेंगू के मामले लगभग पूरी राजधानी में फैल चुके हैं, लेकिन सेंट्रल जोन में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है, जहां सर्वाधिक 38 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद वेस्ट जोन में 30, सिविल लाइंस में 29 और रोहिणी, शाहदरा साउथ जोन में 26-26 मामले सामने आए हैं। पिछले हफ्ते ही डेंगू के 16 और मलेरिया के 12 नए मामले रिपोर्ट किए गए।डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड
डेंगू के खतरे को समझें
डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो एडीज इजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार संक्रमित व्यक्ति में कोई लक्षण नजर नहीं आते। जब लक्षण दिखते हैं, तो उनमें तेज बुखार, भयानक सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल होते हैं। गंभीर मामलों में यह डेंगू हेमरेजिक फीवर का रूप ले सकता है, जिसमें रक्तस्राव और प्लाज्मा रिसाव के कारण यह जानलेवा साबित हो सकता है।डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड
प्रशासन की तैयारी और चुनौतियां

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली नगर निगम ने कमर कस ली है। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्य शर्मा ने बताया कि हिंदू राव अस्पताल में 70, स्वामी दयानंद अस्पताल में 22 और कस्तूरबा अस्पताल में 75 बेड मच्छर जनित बीमारियों के मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं इन अस्पतालों को सेंटिनल सर्विलांस सेंटर के रूप में भी नामित किया गया है।डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड
नगर निगम के अधिकारियों का यह भी मानना है कि बेहतर रिपोर्टिंग और डेटा संग्रह के कारण भी मामलों की संख्या में वृद्धि दिख रही है। हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक तैयारी ही काफी नहीं है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना इसे नियंत्रित करना असंभव है। लोगों को अपने घरों और आस-पड़ोस में पानी जमा होने से रोकना होगा, पानी के बर्तनों को ढक कर रखना होगा और मच्छरदानी जैसे उपायों को अपनाना होगा।डेंगू और मलेरिया का प्रकोप, टूटे कई सालों के रिकॉर्ड



















