
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को कड़ाई से लागू करते हुए भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के आरोपी 50 से अधिक लोक सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस बड़ी कार्रवाई की जद में SDM से लेकर IPS स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं।
कठोर कार्रवाई: सेवा से बर्खास्तगी और नई जांच के आदेश
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर सरकार का ‘महा-एक्शन’:भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में कई अधिकारियों का करियर अब खत्म होने की कगार पर है:
मण्डी सचिव की बर्खास्तगी: कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद कृषि उपज मण्डी समिति के तत्कालीन सचिव को सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismissed) कर दिया गया है।
कर्तव्य से अनुपस्थिति: लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने वाले अधिकारियों को भी सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
पद का दुरुपयोग: राजकोष को नुकसान पहुँचाने के आरोप में तत्कालीन विकास अधिकारी (BDO) के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
वित्तीय प्रहार: रोकी गई वेतन वृद्धि और पेंशन
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर सरकार का ‘महा-एक्शन’:अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए सरकार ने सीसीए (CCA) नियमों के तहत अधिकारियों की आर्थिक कमर तोड़ दी है।
वेतन वृद्धि पर रोक: गंभीर आरोपों में घिरे 27 अधिकारियों की 2 से 4 वेतन वृद्धियां (Increments) संचयी प्रभाव से रोक दी गई हैं। इसका असर उनके वर्तमान वेतन के साथ-साथ भविष्य के रिटायरमेंट लाभों पर भी पड़ेगा।
रिटायर्ड अफसरों पर शिकंजा: मुख्यमंत्री ने 5 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने की मंजूरी दी है, जबकि 9 अन्य मामलों में राज्यपाल को कड़ी कार्रवाई के लिए फाइल भेजी गई है।
अपीलों पर नहीं मिली कोई राहत
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर सरकार का ‘महा-एक्शन’:सजा के खिलाफ जब संबंधित अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में अपील दायर की, तो उन्हें वहां से भी निराशा हाथ लगी। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी कड़क छवि को बरकरार रखते हुए 4 महत्वपूर्ण अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया। केवल एक मामले में परिस्थितियों के आधार पर सजा की मात्रा में मामूली बदलाव किया गया है।
राजस्थान में ‘जीरो टॉलरेंस’ और सुशासन का मॉडल
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर सरकार का ‘महा-एक्शन’:मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस कदम से स्पष्ट संदेश गया है कि राजस्थान में अब भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। एक साथ 50 से अधिक फाइलों का निस्तारण करना यह दर्शाता है कि शासन अब संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय अब लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा, बल्कि यहाँ हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है।
राजस्थान सरकार की इस बड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। आम जनता के बीच इस फैसले का स्वागत हो रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम आदमी को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी तंत्र प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।



















