Halbi Ramayan: Bastar’s Tulsidas: 14 साल की तपस्या से बनी ‘हल्बी रामायण’ अब राष्ट्रपति मुर्मू के सामने होगी पेश, जानें क्या है इसकी अनूठी कहानी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने प्रदर्शित होगी बस्तर की प्रसिद्ध 'हल्बी रामायण'। जानें 14 साल की तपस्या करने वाले 'बस्तर के तुलसीदास' रामसिंह ठाकुर की पूरी कहानी।

Halbi Ramayan Update: बस्तर की लोक-संस्कृति और हल्बी भाषा को इंटरनेशनल पहचान दिलाने वाले ‘बस्तर के तुलसीदास’ की कृति अब देश की प्रथम नागरिक के सामने अपनी चमक बिखेरेगी। जगदलपुर में आयोजित होने वाले ‘बस्तर पंडुम’ (Bastar Pandum) कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) के समक्ष हल्बी रामायण और श्रीमद्भागवत गीता का प्रदर्शन किया जाएगा।
यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि बस्तर के संघर्ष, आस्था और 14 साल की कड़ी तपस्या का परिणाम है।
14 साल का कड़ा संघर्ष: कैसे बनी ‘हल्बी रामायण’? (The Making of Halbi Ramayan)
Halbi Ramayan: बस्तर के प्रख्यात साहित्यकार स्वर्गीय रामसिंह ठाकुर (Late Ram Singh Thakur) ने इस महाकाव्य को तैयार करने में अपनी जिंदगी के 14 अनमोल साल लगा दिए। 1990 में जब यह कृति बनकर तैयार हुई, तो इसने बस्तर के गांवों में एक नई सांस्कृतिक क्रांति (Cultural Revolution) पैदा कर दी।
Halbi Ramayan: रामसिंह ठाकुर ने न केवल रामायण बल्कि श्रीमद्भागवत का भी हल्बी भाषा में अनुवाद किया, ताकि स्थानीय लोग अपनी मातृभाषा में अपनी आस्था को समझ सकें। आज भी उनके लिखे हल्बी गीतों की गूंज आकाशवाणी जगदलपुर पर सुनाई देती है।
मिशनरियों और बाहरी प्रभाव के खिलाफ बनी ‘सांस्कृतिक ढाल’
Halbi Ramayan: 1980 और 1990 के दशक में जब बस्तर अंचल में धर्मांतरण और बाहरी विचारधाराओं का प्रभाव बढ़ रहा था, तब ‘हल्बी रामायण’ ने स्थानीय लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखा।
Government Support: इसकी महत्ता को देखते हुए 1990 में मध्य प्रदेश सरकार और 2015 में छत्तीसगढ़ सरकार ने इसका प्रकाशन करवाकर घर-घर तक पहुँचाया।
Faith & Heritage: हल्बी भाषा में दोहे और चौपाइयों ने बस्तर के आदिवासियों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व (Cultural Pride) पैदा किया।
कौन थे ‘बस्तर के तुलसीदास’ रामसिंह ठाकुर? (Who was Ram Singh Thakur?)
Halbi Ramayan: रामसिंह ठाकुर एक बहुआयामी व्यक्तित्व (Multifaceted Personality) थे। आदिवासी जनजाति से ताल्लुक रखने वाले ठाकुर साहब केवल लेखक ही नहीं, बल्कि एक मंझे हुए:
फोटोग्राफर (Photographer)
मूर्तिकार (Sculptor)
चित्रकार (Painter)
पत्रकार (Journalist)
Halbi Ramayan: उनका योगदान इतना बड़ा है कि ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कई यूनिवर्सिटीज में उनके कार्यों पर Research (शोध) किया जा चुका है। उनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाओं में ‘बस्तर की लोककथाएं’ और ‘छत्तीसगढ़ की लोककथाएं’ शामिल हैं। 2019 में 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।
बस्तर पंडुम: राष्ट्रपति मुर्मू के स्वागत की तैयारी
Halbi Ramayan: जगदलपुर जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन के अनुसार, बस्तर पंडुम कार्यक्रम में कला और साहित्य का विशेष स्टॉल लगाया जा रहा है। यहाँ महामहिम राष्ट्रपति के सामने हल्बी रामायण प्रस्तुत की जाएगी। यह क्षण बस्तर के हर निवासी के लिए गर्व का विषय है क्योंकि यह उनकी मातृभाषा को राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान है।



















