High Court Judgment: पति की मर्जी के बिना गर्भपात कराना ‘क्रूरता’, हाईकोर्ट ने मंजूर की तलाक की अर्जी, पत्नी को मिलेंगे 25 लाख
Chhattisgarh High Court: हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट का फैसला पलटा। कोर्ट ने कहा- बच्चे को बाथरूम में बंद करना और झूठे केस दर्ज कराना मानसिक प्रताड़ना है। 10 साल से अलग रह रहे दंपती का रिश्ता अब खत्म।

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की है कि पत्नी द्वारा पति की सहमति के बिना अपनी मर्जी से गर्भपात (Abortion) कराना पति के प्रति ‘क्रूरता’ (Cruelty) है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने इस आधार पर दुर्ग फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पति की तलाक की अपील मंजूर कर ली है।
कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों के बीच रिश्ता पूरी तरह से टूट चुका है और सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है। हालांकि, कोर्ट ने पति को निर्देश दिया है कि वह पत्नी को जीवनयापन के लिए एकमुश्त 25 लाख रुपये गुजारा भत्ता (Alimony) देगा।पति की मर्जी के बिना गर्भपात कराना ‘क्रूरता’, हाईकोर्ट ने मंजूर की तलाक की अर्जी, पत्नी को मिलेंगे 25 लाख
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दुर्ग निवासी एक दंपती का है। दोनों की शादी 4 मार्च 2009 को भिलाई के साईं मंगलम भवन में हुई थी। उनका एक बेटा भी है। शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गए और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।पति की मर्जी के बिना गर्भपात कराना ‘क्रूरता’, हाईकोर्ट ने मंजूर की तलाक की अर्जी, पत्नी को मिलेंगे 25 लाख
फैमिली कोर्ट का फैसला: पत्नी ने 9 सितंबर 2014 को दुर्ग फैमिली कोर्ट में ‘दांपत्य अधिकारों की बहाली’ (Restitution of Conjugal Rights) के लिए याचिका लगाई थी। 20 दिसंबर 2022 को फैमिली कोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया था और पति को साथ रखने का आदेश दिया था। पति ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।पति की मर्जी के बिना गर्भपात कराना ‘क्रूरता’, हाईकोर्ट ने मंजूर की तलाक की अर्जी, पत्नी को मिलेंगे 25 लाख
पति ने लगाए थे गंभीर आरोप (Husband’s Allegations)
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पति ने पत्नी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए, जिसे कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सही माना:
जबरन गर्भपात: पति का कहना था कि पत्नी गर्भधारण नहीं करना चाहती थी। उसने बिना बताए गर्भपात की गोलियां खाईं और दो बार एबॉर्शन करा लिया।
बच्चे के साथ क्रूरता: आरोप है कि पत्नी अपने ही बेटे को बेवजह पीटती थी और उसे बाथरूम में बंद कर देती थी।
जानलेवा हमला: पति ने बताया कि पत्नी ने घर में चाकू और लोहे की रॉड से हमला करने की कोशिश की थी।
झूठे केस: पत्नी द्वारा पुलिस में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पत्नी की दलीलें (Wife’s Arguments)
वहीं, पत्नी ने अपने बचाव में कहा कि ससुराल वाले उसे मामूली बातों पर तंग करते थे। हनीमून से लौटने के बाद उसे परीक्षा के बहाने मायके भेज दिया गया। उसने आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान उसे उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई, जिससे उसका गर्भपात हुआ। 2014 में उसे पुलिस की मदद से ससुराल से निकाला गया।पति की मर्जी के बिना गर्भपात कराना ‘क्रूरता’, हाईकोर्ट ने मंजूर की तलाक की अर्जी, पत्नी को मिलेंगे 25 लाख
हाईकोर्ट ने क्यों दिया तलाक का आदेश?
हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान और दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि पत्नी का व्यवहार क्रूरता की श्रेणी में आता है।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ‘समर घोष बनाम जया घोष’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में इस तरह का व्यवहार मानसिक और शारीरिक क्रूरता है।
रिश्ता टूटने के सबूत: कोर्ट ने नोट किया कि दंपती 2014 से (10 साल से अधिक) अलग रह रहे हैं। पत्नी न तो ससुर की सर्जरी के वक्त देखने गई और न ही उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुई।
मध्यस्थता विफल: कोर्ट ने कहा कि कई बार मध्यस्थता की कोशिशें भी नाकाम रहीं, जिससे यह साबित होता है कि शादीशुदा रिश्ता ‘इररिट्रीवेबल ब्रेकडाउन’ (सुधार से परे) की स्थिति में पहुंच चुका है।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए तलाक पर मुहर लगा दी।पति की मर्जी के बिना गर्भपात कराना ‘क्रूरता’, हाईकोर्ट ने मंजूर की तलाक की अर्जी, पत्नी को मिलेंगे 25 लाख



















