High Court Verdict: Rape Case में बड़ा फैसला, Victim की गवाही में Contradictions, Accused Acquitted

High Court Verdict: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव rape case में हाईकोर्ट ने victim की गवाही में विरोधाभास और कमजोर सबूतों के आधार पर आरोपी को बरी किया। जानें पूरा मामला।
📌 क्या है पूरा मामला?
High Court Verdict: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव थाना क्षेत्र से जुड़े एक पुराने rape case में High Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को benefit of doubt देकर बरी कर दिया। यह निर्णय Justice नरेंद्र कुमार व्यास की single bench द्वारा दिया गया।
⚖️ Trial Court vs High Court: क्या हुआ बदलाव?
- Trial Court ने आरोपी को IPC Section 376 (rape) के तहत 7 साल की सजा सुनाई थी
- साथ ही Section 506-B (criminal intimidation) में 6 महीने की सजा दी गई थी
- आरोपी ने CrPC Section 374 के तहत High Court में appeal दायर की
👉 High Court ने पूरे evidence और testimonies की दोबारा जांच की और फैसला पलट दिया।
🧾 Victim Statement में Contradictions बने बड़ा कारण
High Court Verdict: High Court ने अपने फैसले में कहा कि victim की गवाही “sterling quality” की नहीं थी।
मुख्य points:
- बयान में कई contradictions और inconsistencies पाए गए
- घटना के 2–3 दिन बाद victim और accused को साथ देखा गया
- ग्रामीणों के कहने पर दोनों साथ रहने लगे
- Victim ने खुद कहा कि अगर आरोपी उसे अपना लेता, तो FIR दर्ज नहीं होती
👉 यह बातें prosecution case को कमजोर करती हैं।
🧪 Medical & Forensic Evidence ने नहीं किया Support
High Court Verdict: Court ने evidence पर भी सवाल उठाए:
- शरीर पर कोई injury marks नहीं मिले
- Medical report में forceful relation के clear signs नहीं
- FSL (Forensic Science Lab) report भी negative रही
📍 Delay in FIR बना Suspicious Point
- घटना के लगभग 8 दिन बाद FIR दर्ज हुई
- देरी का कारण पंचायत बताया गया
- लेकिन Court ने इसे doubtful circumstance माना
👉 साथ ही घटना स्थल घरों के बीच था, जहां आवाज आसानी से सुनी जा सकती थी, फिर भी किसी ने कुछ नहीं सुना।
⚖️ High Court का Clear Observation
High Court Verdict: High Court ने कहा:
“केवल victim की गवाही पर conviction तभी संभव है, जब वह पूरी तरह reliable, consistent और doubt से परे हो।”
👉 इस case में ऐसा नहीं पाया गया, इसलिए आरोपी को benefit of doubt देकर बरी कर दिया गया।



















