IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा! 8 बार मिली असफलता, पर आखिरी मौके पर जितेंद्र ने हासिल की 287वीं रैंक

IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा! 8 बार मिली असफलता, पर आखिरी मौके पर जितेंद्र ने हासिल की 287वीं रैंक, कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। राजस्थान के बालोतरा जिले के जितेंद्र प्रजापत ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। लगातार 8 बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल होने के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने 9वें व अंतिम प्रयास में 287वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने का सपना पूरा किया।
अंतिम मौका और भावनाओं का सैलाब
IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा!UPSC 2026 के परिणाम घोषित होते ही जितेंद्र की आँखों में खुशी के आँसू छलक पड़े। यह उनके करियर का आखिरी दांव था। सालों की तपस्या और असफलताओं के बोझ के बाद जब लिस्ट में अपना नाम देखा, तो उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। कई बार रोल नंबर चेक करने के बाद जब उन्हें विश्वास हुआ कि वे अब एक अधिकारी बन चुके हैं, तब जाकर उन्होंने राहत की सांस ली।
साधारण परिवार: पिता चलाते हैं कैंटीन
IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा!जितेंद्र बालोतरा शहर के नयापुरा इलाके के रहने वाले हैं। उनकी सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वे एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता, मोतीलाल प्रजापत, गुजरात के गांधीधाम में एक निजी कंपनी में कैंटीन चलाने का काम करते हैं। सीमित आय के बावजूद परिवार ने जितेंद्र के सपनों के बीच कभी आर्थिक तंगी को आने नहीं दिया।
6 साल का कड़ा संघर्ष और दिल्ली का ‘वनवास’
IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा!अपनी मंजिल को पाने के लिए जितेंद्र पिछले 6 वर्षों से दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहे थे। अपनी पढ़ाई के प्रति वे इतने समर्पित थे कि साल में केवल एक बार ही अपने घर बालोतरा आते थे। गुजरात से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज को अपना लक्ष्य बनाया था।
परिवार का सहयोग: भाई और बहन की भूमिका
IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा!जितेंद्र के परिवार में उनके बड़े भाई अपने पिता के साथ कैंटीन के काम में हाथ बँटाते हैं, ताकि घर की आर्थिक स्थिति मजबूत रहे। वहीं उनकी बहन एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं। परिवार के इस मज़बूत सपोर्ट सिस्टम ने जितेंद्र को बार-बार मिल रही असफलताओं के बावजूद टूटने नहीं दिया।
लक्ष्य के लिए शादी तक को टाला
IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा!जितेंद्र के समर्पण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने करियर के लिए अपनी शादी तक टाल दी थी। परिजनों के अनुसार, उनकी शादी दो साल पहले ही तय हो गई थी, लेकिन जितेंद्र ने यह प्रण लिया था कि वे ‘IAS’ बनने के बाद ही दूल्हा बनेंगे। अब सफलता मिलने के बाद, आगामी 21 अप्रैल को वे विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं।
UPSC उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा
IAS Success Story: हार न मानने का जज्बा!जितेंद्र प्रजापत की यह कहानी उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक मिसाल है जो एक या दो बार असफल होने के बाद हिम्मत हार जाते हैं। उनकी जीत यह सिखाती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो अंतिम प्रयास में भी इतिहास रचा जा सकता है।



















