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Bhilai: लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे

आचार संहिता में बीएसपी, निगम और प्रशासन नहीं कर रही कार्रवाई

NCG News desk Durg:-

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दुर्ग। लोकसभा चुनावी आचार संहिता का बेजा फायदा भू माफिया उठाने लगे हैं। रिसाली, उतई फोरलेन मार्ग के किनारे रातोंरात अवैध कब्जे बढ़ने लगे हैं। पहले ही यहां की सैकड़ों एकड़ जमीन कब्जे में हैं और इसकी वजह से रिसाली निगम को विकास के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। बीएसपी क्षेत्र होने की वजह से न रिसाली निगम अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई करती है और न ही बीएसपी। जिला प्रशासन का राजस्व विभाग भी मूकदर्शक बना हुआ है। फोरलेन किनारे बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जों की बाढ़ सी आ गई है। यही स्थिति भीतरी कालोनियों में जाने वाली मार्ग की है।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

1. मरोदा ओवरब्रिज के नीचे उतई मार्ग पर फोरलेन के दोनों किनारे अवैध कब्जे हैं। यहां लोगों ने रातोंरात बांस-बल्ली डालकर पहले कब्जा किया और उसके बाद अब यहां दुकानें डाल दी। ठेले- खोमचे लगाकर अवैध कब्जा कर लिया गया है। एक कब्जेदार ने तो कंस्ट्रक्शन भी कर कब्जा को स्थाई कर लिया है।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे

2.मरोदा से उमरपोटी जाने वाली मुख्य मार्ग पर कब्जा किया जा रहा है। यहां पर बीएसपी की नर्सरी है। बढ़ते अवैध कब्जे के मद्देनजर बीएसपी ने नर्सरी को संरक्षित करने पोल लगाकर तार का घेरा किया हुआ है। यहां के ठीक यात्री प्रतिक्षालय के बाजू में तार घेरे और सड़क के बीच किनारे पर ही एक खोमचे लगाकर कब्जा कर सीमेंटीकृत कर लिया गया है।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

आचार संहिता में बीएसपी, निगम और प्रशासन नहीं कर रही कार्रवाई

3. नेवई क्षेत्र में डेम के सामने लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। यहां पर स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के आसपास भी अवैध कब्जे बढ़ गए हैं। यहां पर सड़क के दोनों किनारे पर होटल, ठेले लगाकर बेखौफ कारोबार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत के बाद भी कब्जों को स्थाई तौर पर हटाने की कार्रवाई बहीं की गई।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

आचार संहिता में बीएसपी, निगम और प्रशासन नहीं कर रही कार्रवाई

4. रिसाली के चर्च और स्कूल के आगे मोड पर कब्जे कर कारोबार फल-फूल रहा हैं। यहां सड़क किनारे ठेले और खोमचे के साथ पसरा लगाकर कब्जे किए गए हैं। यही स्थिति रुआबांधा क्षेत्र की है। कब्जों की लंबी फेहरिस्त है। उसके बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसलिए कब्जेदारों के हौसले बुलंद हैं।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

कार्रवाई के बाद सेटिंग

बीएसपी ने वार्ड क्रमांक 17 के आखरी छोर पर तालाब किनारे बड़े क्षेत्र में हुए अवैध कब्जे को हटाने की कार्रवाई की थी। यहां पर फर्शीकरण की फैक्टरी भी संचालित की जा रही थी। खटाल संचालकों ने अपना कब्जा कई एकड़ जमीन पर बढ़ा ली थी। इस कार्रवाई में तोड़-फोड़ तो की गई लेकिन उसके बाद सुध नहीं ली। हाल यह है कि कब्जेदारों ने फिर से उसी जगह पर गिरी हुई ईटों से दीवार खड़ी कर ली। न फैक्टरी हटी और न ही लोगों ने कब्जे को हटाया है। चर्चा है कि कार्रवाई के बाद सेटिंग का खेल चला।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

राजनैतिक संरक्षण से बढ़ने लगे कब्जे

भूमाफियाओं को राजनैतिक संरक्षण होने के चलते अवैध कब्जे लगातार बढ़ने लगे हैं। पिछले पांच साल के दौरान यहां पर तत्कालीन सरकार से जुड़े लोगों का संरक्षण ऐसा रहा कि मरोदा, नेवई, नेवईभाठा, रिसाली, रुआबांधा, उतई, पतोरा सहित. आसपास ग्रामीण इलाके के चौक-चौराहे में लोगों ने कब्जा करना शुरू कर दिया। टंकी मरोदा क्षेत्र में फोरलेन किनारे की दुकानें अब सड़क तक आ गई है। कोई ऊपर दुकान जाने के लिए सीढ़ी सड़क पर बना ली है तो किसी ने अपनी दुकानें तीन-टप्पर लगाकर आगे तक बढ़ा ली है। निगम ने यहां पर. एक दिन कार्रवाई की उसके बाद हाल जस का तस हो गया।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

कब्जों से दुघर्टना का खतरा बढ़ा

रिसाली उतई फोरलेन बनने के बाद दोनों तरफ कब्जा बढ़‌ने से दुघटना का खतरा काफी बढ़ गया है। फोरलेन बनने के बाद यहां पर वाहन तेज रफ्तार आती-जाती है। कब्जे में अवैध रूप से कई दुकानें संचालित हो रही है। चाय-नाश्ता का कारोबार भी चल रहा है। इसलिए लोग दुकानों में आते जाते हैं। जिसकी वजन से ट्रैफिक जाम हो जाता है। ऐसे में यहां पर दुघर्टना का जोखिम बना रहता है। लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई

इस फोरलेन के किनारे सालों पहले नर्सरी लगाई गई थी जो वर्तमान में बड़े वृक्ष का रूप ले चुके हैं। कब्जे के लिए इन पेड़ों को तेजी से काटे जा रहे हैं। जिसे रोकने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है। लोगों ने सड़क किनारे मुरुम डालकर भी लोगो ने कब्जे को और बढ़ा लिया है। पहले विधानसभा चुनाव के दौरान कब्जे बढ़े और अब लोकसभा चुनाव में इसकी गति दोगुनी हो गई है।लोकसभा चुनावी आचार संहिता के बीच बढ़ने लगे शहर में अवैध कब्जे।

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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