
बेंगलूरु जेल में सनसनीखेज खुलासा: मनोचिकित्सक ही चला रहा था ‘मोबाइल शॉप’, आतंकी को बेचता था फोन
बेंगलूरु जेल में सनसनीखेज खुलासा: मनोचिकित्सक ही चला रहा था ‘मोबाइल शॉप’, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बेंगलूरु केंद्रीय कारागार में एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। जेल में तैनात एक मनोचिकित्सक ही कैदियों के लिए ‘मोबाइल शॉप’ चला रहा था और उन्हें तीन गुना कीमत पर फोन बेचकर शानदार जिंदगी जी रहा था। यह पूरा मामला तब खुला जब एनआईए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी टी. नसीर से जुड़े एक मामले की जांच कर रही थी।
डॉक्टर का ‘साइड बिजनेस’: 8 हजार का फोन 25 हजार में, तीन गुना मुनाफा
एनआईए की जांच में सामने आया है कि जेल में मनोचिकित्सक के पद पर तैनात डॉ. एस नागराज इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड था। वह बाहर से 8 से 10 हजार रुपये में मोबाइल फोन खरीदकर उन्हें जेल के अंदर कैदियों को 25 हजार रुपये में बेचता था, जिससे उसे तीन गुना तक मुनाफा होता था। इस कमाई से वह एक लक्जरी जीवन जी रहा था। एनआईए ने डॉ. नागराज को कैदियों को मोबाइल फोन मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।बेंगलूरु जेल में सनसनीखेज खुलासा: मनोचिकित्सक ही चला रहा था ‘मोबाइल शॉप’
आतंकी टी. नसीर और कट्टरपंथ का नेटवर्क
यह मामला आतंकी टी. नसीर की वजह से सामने आया, जो केरल में एक आतंकी वारदात का दोषी है और 2008 के बेंगलूरु सीरियल बम धमाकों का आरोपी भी है। नसीर पर यह भी आरोप है कि वह जेल के अंदर युवा कैदियों को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेल रहा था। एनआईए को शक है कि इन मोबाइल फोन का इस्तेमाल जेल के भीतर से ही कट्टरपंथ का नेटवर्क चलाने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।बेंगलूरु जेल में सनसनीखेज खुलासा: मनोचिकित्सक ही चला रहा था ‘मोबाइल शॉप’
NIA की जांच का दायरा: पैसे कहाँ से आए और कौन-कौन शामिल?
एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने जांच एजेंसी को उन कैदियों से जेल में पूछताछ की अनुमति दे दी है, जिन्होंने डॉ. नागराज से मोबाइल खरीदे थे। अब एनआईए इस बात की जांच कर रही है कि कैदियों के पास फोन खरीदने के लिए पैसा कहां से आ रहा था और इस रैकेट में जेल के और कौन-कौन से कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।बेंगलूरु जेल में सनसनीखेज खुलासा: मनोचिकित्सक ही चला रहा था ‘मोबाइल शॉप’



















