भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’, लोगों की चीखें – ‘अब बेटियों की शादी कैसे होगी?’

भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’, लोगों की चीखें – ‘अब बेटियों की शादी कैसे होगी?’
मुख्य बिंदु:-
भरतपुर में 80 फीट चौड़ी सड़क के लिए सैकड़ों मकानों पर लगे लाल निशान।
WhatsApp Group Join NowFacebook Page Follow NowYouTube Channel Subscribe NowTelegram Group Follow NowInstagram Follow NowDailyhunt Join NowGoogle News Follow Us!पीढ़ियों से रह रहे लोगों के आशियाने उजड़ने का खतरा, परिवारों में छाया मातम।
भुक्तभोगियों की नींद हराम, रोजी-रोटी पर भी पड़ा असर।
प्रशासन का आश्वासन: मालिकाना हक होने पर मिलेगा मुआवजा या जमीन, अवैध निर्माण टूटेंगे।
भरतपुर शहर में विकास की एक परियोजना ने सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। विश्वप्रिय शास्त्री पार्क से बीनारायण गेट तक सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना के तहत नगर निगम ने मकानों पर ‘लाल निशान’ लगा दिए हैं, जो इन परिवारों के लिए किसी बर्बादी के पैगाम से कम नहीं हैं। अब इन लोगों को डर सता रहा है कि उनका दशकों पुराना आशियाना उजड़ जाएगा और वे सड़क पर आ जाएंगे।भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’
लाल निशान और उजड़ी नींदें: क्या है पूरा मामला?
शहर को एक नई और चौड़ी सड़क देने के लिए नगर निगम ने सड़क के दोनों ओर बने मकानों को तोड़ने की तैयारी कर ली है। इसके लिए घरों पर 18 से 29 फीट तक अंदर निशान लगाए गए हैं। इन निशानों ने वहाँ रह रहे लोगों के भविष्य पर ही एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कई मकान तो लगभग पूरे ही इस जद में आ रहे हैं, जिससे लोग बेघर होने की कगार पर पहुँच गए हैं। जब से ये निशान लगे हैं, कई मजदूरों ने डर और चिंता के कारण काम पर जाना ही बंद कर दिया है।भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’
हर घर की एक दर्दभरी कहानी
इन लाल निशानों के पीछे हर दरवाजे पर एक दर्दभरी कहानी है। लोगों का दर्द उनकी जुबानी सुनिए:
मीरा का दर्द: ‘घर नहीं रहेगा तो बेटियों के हाथ पीले कैसे होंगे?’

मीरा बताती हैं कि उनका तीन मंजिला मकान है, जिसमें तीन भाइयों का परिवार एक साथ रहता है। पूरे मकान पर 29 फीट का लाल निशान लगा है। वह रोते हुए कहती हैं, “11 दिसंबर को घर में दो बेटियों की शादी है। जब सिर छिपाने के लिए छत ही नहीं रहेगी, तो हम मेहमानों को कहाँ ठहराएंगे और शादी कैसे करेंगे?”भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’
बीना की बेबसी: ‘घर में मातम पसरा है, बहू पीहर चली गई’
बीना के घर में 12 लोग रहते हैं। उनके मकान पर भी लाल निशान है। वह कहती हैं, “जब से निशान लगे हैं, हमारी नींद हराम हो गई है। घर में खाना तक नहीं बन रहा। नवंबर में बेटी की शादी है, लेकिन इस सदमे से मेरी एक बहू घर छोड़कर अपने पीहर चली गई है।”नत्थो देवी की चिंता: ‘बेटे की रोजी-रोटी और हमारा ठिकाना, सब छिन जाएगा’

नत्थो देवी का 40 फीट का पूरा मकान जद में आ रहा है। उनका बेटा छोले-भटूरे की ढकेल लगाकर परिवार का पेट पालता है। वह कहती हैं, “अब हम इस उम्र में पूरे परिवार को लेकर कहाँ जाएंगे? रहने की समस्या ने हमें तोड़ दिया है।”भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’
हरमुख की गुहार: ‘हम चार भाइयों का परिवार कहाँ जाएगा?’
हरमुख बताते हैं कि उनके 75 वर्गगज के छोटे से मकान में चार भाइयों का परिवार रहता है। सभी मजदूरी करके गुजारा करते हैं। पूरा मकान टूटने की कगार पर है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें इसके बदले कोई और जगह दी जाए ताकि वे अपने रहने का इंतजाम कर सकें।
क्या मिलेगा मुआवजा? प्रशासन का क्या है कहना?
इस मामले पर नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार ने बताया कि फिलहाल 50-60 घरों पर निशान लगाए गए हैं। जल्द ही इन लोगों को नोटिस दिए जाएंगे और उनसे मकान के मालिकाना हक (टाइटल/पट्टा) के दस्तावेज मांगे जाएंगे।भरतपुर में ‘विकास’ का कहर: सैकड़ों घरों पर लगे ‘लाल निशान’
जिनके पास पट्टा है: यदि किसी के पास वैध टाइटल या पट्टा है, तो नियमानुसार उन्हें या तो मुआवजा दिया जाएगा या फिर रहने के लिए कोई अन्य जगह आवंटित की जाएगी।
जिनके पास पट्टा नहीं है: यदि किसी ने कृषि भूमि पर बिना किसी टाइटल के अवैध रूप से मकान बनाया है, तो उसे अतिक्रमण मानकर तोड़ा जाएगा।



















