किसानों के नाम पर करोड़ों की लूट! घटिया सीमेंट-रेत से बन रही नहर, बनते ही पड़ने लगीं दरारें

किसानों के नाम पर करोड़ों की लूट! घटिया सीमेंट-रेत से बन रही नहर, बनते ही पड़ने लगीं दरारें
कोरबा: किसानों के नाम पर करोड़ों की लूट! घटिया सीमेंट-रेत से बन रही नहर, छत्तीसगढ़ के पाली में किसानों के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यहाँ जल संसाधन विभाग द्वारा पौने तीन करोड़ की लागत से बनाई जा रही सिंचाई नहर में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। किसानों और स्थानीय जनपद सदस्य ने आरोप लगाया है कि अफसर और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे करोड़ों की यह किसान-हितैषी योजना बनने से पहले ही दम तोड़ रही है।
पौने तीन करोड़ की योजना, पर गुणवत्ता में भारी धोखा
यह मामला पाली के सेन्द्रीपाली बांध से निकल रही 2400 मीटर लंबी माइनर नहर के सीसी लाइनिंग कार्य का है। लगभग 2 करोड़ 76 लाख की इस परियोजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता देखकर किसानों के होश उड़े हुए हैं। क्षेत्र क्रमांक-12 की जनपद सदस्य श्रीमती संगीता सूरज कोराम और स्थानीय किसानों का आरोप है कि नहर बनते ही टूटने और चटकने लगी है। उनका कहना है कि यह नहर पानी का तेज बहाव नहीं झेल पाएगी और जल्द ही टूट जाएगी, जिससे न केवल सरकारी पैसा बर्बाद होगा, बल्कि किसानों की फसलें भी चौपट हो सकती हैं।किसानों के नाम पर करोड़ों की लूट! घटिया सीमेंट-रेत से बन रही नहर
नियमों की धज्जियां: 53 ग्रेड की जगह 43 ग्रेड सीमेंट, नाले की रेत से हो रहा निर्माण
भ्रष्टाचार की परतें तब और खुलती हैं जब निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच की जाती है:
घटिया रेत का इस्तेमाल: ठेकेदार द्वारा नहर निर्माण में अच्छी गुणवत्ता वाली रेत की जगह आसपास के नालों से बजरी-युक्त और मिट्टी मिली (गाद वाली) रेत का उपयोग किया जा रहा है। यह रेत पक्के निर्माण को कमजोर बनाती है।
सीमेंट में बड़ा खेल: आरोप है कि पुल और बांध जैसी मजबूत संरचनाओं के लिए जरूरी 53 ग्रेड सीमेंट की जगह, ठेकेदार 43 ग्रेड सीमेंट का उपयोग कर रहा है। 43 ग्रेड सीमेंट का इस्तेमाल आमतौर पर छोटे-मोटे प्लास्टर के कामों में होता है। इतना ही नहीं, सीमेंट की मात्रा भी कम रखी जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके।
भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश? निर्माण स्थल से सूचना बोर्ड भी गायब
सरकारी नियमों के अनुसार, हर निर्माण स्थल पर एक सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, जिसमें परियोजना की लागत, ठेकेदार का नाम, और संबंधित अधिकारियों की जानकारी होती है। लेकिन इस करोड़ों के प्रोजेक्ट में पारदर्शिता को ताक पर रख दिया गया है। मौके पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, ताकि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को आसानी से छिपाया जा सके।किसानों के नाम पर करोड़ों की लूट! घटिया सीमेंट-रेत से बन रही नहर
जिम्मेदार अफसर नदारद, ऑफिस से गायब रहते हैं SDO
इस पूरे घोटाले में जल संसाधन उपसंभाग, पाली के SDO एस.पी. टुंडे की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि वे दफ्तर से अक्सर गायब रहते हैं और सप्ताह में एक-दो दिन ही कुछ घंटों के लिए आते हैं। उनके इस रवैये से न केवल निर्माण कार्यों में लूट को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे जैसे कामों के लिए दफ्तर के चक्कर काट रहे किसान भी भटकने को मजबूर हैं। जब इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई, तो वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे।किसानों के नाम पर करोड़ों की लूट! घटिया सीमेंट-रेत से बन रही नहर



















