जामताड़ा तो बस झांकी है! दिल्ली पुलिस ने AI से पकड़ा 944 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 10 राज्यों में चला ‘ऑपरेशन सायहॉक’

साइबर अपराध की दुनिया में अब तक आपने जामताड़ा गैंग की कहानियां सुनी होंगी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जिस रैकेट का पर्दाफाश किया है, उसका दायरा हैरान करने वाला है। दिल्ली पुलिस ने एक ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सायहॉक’ (Operation CyHawk) को अंजाम दिया है।
इस सीक्रेट मिशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पुलिस ने करीब 944 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन को ट्रेस किया है। आइए जानते हैं कि कैसे 10 राज्यों में फैले इस जाल को पुलिस ने महज 48 घंटों में काट दिया।दिल्ली पुलिस ने AI से पकड़ा 944 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 10 राज्यों में चला ‘ऑपरेशन सायहॉक’
10 राज्य, 48 घंटे और 5000 पुलिसकर्मी: ऑपरेशन सायहॉक की इनसाइड स्टोरी
यह कार्रवाई किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। 10 दिसंबर को शुरू हुए इस ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ देश भर के 10 राज्यों में 5,000 से अधिक पुलिसकर्मी और साइबर एक्सपर्ट्स एक साथ एक्टिव हुए। इस मिशन का दायरा दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम तक फैला था। इसका मकसद सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उस पूरे इकोसिस्टम को तबाह करना था जो साइबर ठगी को अंजाम देता है।दिल्ली पुलिस ने AI से पकड़ा 944 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 10 राज्यों में चला ‘ऑपरेशन सायहॉक’
फेक कॉल पर नहीं, ‘मनी ट्रेल’ पर किया गया सीधा वार
आमतौर पर पुलिस उन ठगों के पीछे भागती है जो फोन करके OTP मांगते हैं, लेकिन इस बार रणनीति बदली गई थी। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस बार निशाना वो ‘चेहरे’ नहीं थे जो कॉल करते हैं, बल्कि वो ‘सिस्टम’ था जो पैसों को ठिकाने लगाता है। पुलिस ने सीधे पैसों के लेन-देन (Money Trail) पर चोट की। इसमें फर्जी सिम कार्ड सप्लाई करने वाले और बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दलाल रडार पर थे।दिल्ली पुलिस ने AI से पकड़ा 944 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 10 राज्यों में चला ‘ऑपरेशन सायहॉक’
AI बना पुलिस का सबसे बड़ा हथियार: ऐसे खुली पोल
इतने बड़े पैमाने पर डेटा की जांच करना इंसानी क्षमता से बाहर था, इसलिए पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया।
पुलिस ने नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 4,058 शिकायतों का डेटा AI टूल्स में फीड किया।
AI ने उन संदिग्ध बैंक खातों के पैटर्न को पहचान लिया जो एक साथ एक्टिव थे और जिनमें असामान्य गति से पैसा ट्रांसफर हो रहा था।
जांच में सामने आया कि ठगी का पैसा आते ही उसे तुरंत कई खातों में घुमाया जाता और अंत में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) बनाकर विदेश भेज दिया जाता।
क्या हैं ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts)?
इस जांच में ‘म्यूल अकाउंट्स’ का बड़ा खेल सामने आया है। आसान शब्दों में कहें तो ये ‘किराये के खाते’ होते हैं। साइबर अपराधी गरीब मजदूरों, छात्रों या ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। खाताधारक को पता भी नहीं होता कि उसके खाते का नेट बैंकिंग और एटीएम कार्ड अपराधी इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये इधर से उधर किए जा रहे थे।दिल्ली पुलिस ने AI से पकड़ा 944 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 10 राज्यों में चला ‘ऑपरेशन सायहॉक’
भविष्य की तैयारी: अब रियल टाइम में पकड़े जाएंगे ठग
‘ऑपरेशन सायहॉक’ की सफलता ने सरकार और जांच एजेंसियों को एक नया रोडमैप दिया है। अब सरकार एक ‘नेशनल एंटी-फ्रॉड फ्रेमवर्क’ तैयार कर रही है। इसके तहत एक ‘फाइनेंशियल डेटा फ्यूजन सेंटर’ (FDFC) बनाया जाएगा। यहाँ बैंक, पुलिस, टेलीकॉम कंपनियां और यूपीआई ऐप्स (जैसे Paytm/PhonePe) मिलकर काम करेंगे। इससे फायदा यह होगा कि जैसे ही कोई ठगी होगी, रियल टाइम डेटा शेयरिंग से पैसा तुरंत ब्लॉक किया जा सकेगा।दिल्ली पुलिस ने AI से पकड़ा 944 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 10 राज्यों में चला ‘ऑपरेशन सायहॉक’



















