जांजगीर: जवान बेटे की मौत का गम नहीं सह पाया दंपति, वाट्सएप स्टेटस लगा कर दी अपनी जान

जांजगीर जांजगीर: जवान बेटे की मौत का गम नहीं सह पाया दंपति, वाट्सएप स्टेटस लगा कर दी अपनी जान, जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ के धरदेई गांव में एक पति-पत्नी ने अपने इकलौते बेटे के वियोग में आत्मघाती कदम उठा लिया। बेटे की मौत के एक साल बाद भी दंपति उस गहरे सदमे से उबर नहीं पाए थे और अंततः उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
धरदेई गांव में पसरा सन्नाटा: बंद कमरे में मिले शव
जांजगीर: मिली जानकारी के अनुसार, धरदेई गांव के निवासी कृष्णा पटेल और उनकी पत्नी रमाबाई पटेल काफी समय से मानसिक तनाव में थे। जब काफी देर तक उनके घर का दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई। ग्रामीणों ने जब खिड़की से भीतर झांका, तो उनके होश उड़ गए—दंपति फांसी के फंदे पर झूल रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शवों को नीचे उतारा।
वाट्सएप स्टेटस पर लिखा आखिरी संदेश
जांजगीर: इस आत्मघाती कदम को उठाने से पहले दंपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वाट्सएप का सहारा लिया। उन्होंने अपने स्टेटस पर एक भावुक संदेश लिखा कि “बेटे के जाने के बाद अब वे भी इस दुनिया को छोड़कर जा रहे हैं।” इस स्टेटस को देखकर ही परिजनों और ग्रामीणों को उनकी मानसिक स्थिति का अंदाजा हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इकलौते बेटे की सड़क हादसे में हुई थी मौत
जांजगीर: परिजनों ने बताया कि करीब एक साल पहले इस दंपति के इकलौते जवान बेटे की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। घर के चिराग के बुझने के बाद से ही कृष्ण और रमाबाई पूरी तरह टूट चुके थे। वे अक्सर गुमसुम रहते थे और किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। मानसिक आघात और बेटे की याद ने उन्हें इस कदर झकझोरा कि उन्होंने मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
पुलिस की कार्रवाई और एसपी का बयान
जांजगीर: मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांजगीर-चांपा के एसपी विजय कुमार पांडेय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला मानसिक तनाव और पुत्र वियोग का लग रहा है। पुलिस ने शवों का पंचनामा कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जांजगीर: एसपी ने कहा, “दंपति अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद से काफी परेशान रहते थे। उन्होंने सुसाइड से पहले वाट्सएप स्टेटस भी लगाया था। फिलहाल मर्ग कायम कर लिया गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों की पुष्टि हो पाएगी।”
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी बन रही है खतरा
जांजगीर: यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि अपनों को खोने का गम कभी-कभी इंसान को मानसिक रूप से इतना कमजोर कर देता है कि वह जानलेवा कदम उठा लेता है। ऐसे समय में परिवार और समाज को शोक संतप्त व्यक्तियों का सहारा बनना चाहिए ताकि उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकाला जा सके।



















